Kalava Tie Rules : महिलाएं किस हाथ में बंधवाएं कलावा? कुंवारी लड़कियों के लिए अलग नियम
महिलाएं किस हाथ में बंधवाएं कलावा? कुंवारी लड़कियों के लिए अलग नियम
महिलाएं किस हाथ में बंधवाएं कलावा? कुंवारी लड़कियों के लिए अलग नियम
Dharma Aastha : पूजा-अनुष्ठानों में कलाई पर कलावा बंधवाने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा केवल एक धागा नहीं बल्कि सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है. मान्यता है कि कलावा बांधने से व्यक्ति के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है, जो उसे नकारात्मक प्रभावों और बाधाओं से बचाता है. इसके धागों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ माता लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती का वास होता है. लोकल 18 से अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि कलावा व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ने का भी एक माध्यम माना गया है. शास्त्रों में महिलाओं और पुरुषों के लिए कलावा बांधने के अलग-अलग नियम बताए गए हैं. कुंवारी कन्याओं को दाहिने हाथ में और विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ में कलावा धारण करना शुभ माना जाता है. पुरुषों को दाहिने हाथ की कलाई पर कलावा बांधने का विधान है. कलावा बंधवाते समय सिर को रुमाल, दुपट्टे या पल्लू से ढंकना चाहिए. मुट्ठी में चावल, पुष्प या दक्षिणा रखकर कलावा बंधवाना शुभ माना गया है.


