घर में बढ़ रही कलह, जितना भी कमाओ हमेशा कम…आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?
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Main Door Vastu : घर के मुख्य द्वार पर जूते-चप्पलों का ढेर लगाना सिर्फ अव्यवस्था नहीं बल्कि वास्तु मान्यताओं के अनुसार ये नकारात्मक ऊर्जा भी खींचता है. मुख्य द्वार पर जूते-चप्पल उतारकर रखना या उनका ढेर लगाने से राहु, केतु और शनि से जुड़े दोष प्रभावी हो सकते हैं. लोकल 18 से फरीदाबाद के पंडित उमाचन्द्र मिश्रा बताते हैं कि मुख्य द्वार से घर में सुख-शांति बनी रहती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है और परिवार में खुशहाली का वातावरण बना रहता है. कोशिश करनी चाहिए कि जूते-चप्पल मुख्य द्वार के सामने न रखे जाएं और दहलीज को हमेशा साफ रखा जाए. मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, श्री और शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिन्ह बनाना चाहिए. घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है तो हनुमान जी की प्रतिमा भी लगा सकते हैं.
फरीदाबाद. बरकत आने के बजाय अगर घर में बिना वजह कलह बढ़ने लगे, आर्थिक परेशानियां बार-बार सामने आने लगें और मानसिक अशांति बनी रहे तो लोग अक्सर इसकी वजह समझ नहीं पाते. वास्तु शास्त्र में ऐसी कई छोटी-छोटी आदतों का जिक्र मिलता है, जिनका सीधा असर घर के वातावरण पर पड़ता है. इन्हीं में से एक आदत है घर के मुख्य द्वार पर जूते-चप्पलों का ढेर लगाना. वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी के प्रवेश का स्थान माना जाता है. ऐसे में यहां गंदगी या जूते-चप्पल फैलाकर रखना शुभ नहीं माना जाता.
मां पार्वती का प्रतीक
लोकल 18 से फरीदाबाद के पंडित उमाचन्द्र मिश्रा बताते हैं कि घर के मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए. वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को मां लक्ष्मी के प्रवेश का स्थान माना गया है, जबकि घर की दहलीज माता पार्वती का प्रतीक मानी जाती है. इसलिए जितनी अधिक स्वच्छता यहां रखी जाएगी, उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा. मुख्य द्वार से घर में सुख-शांति बनी रहती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है और परिवार में खुशहाली का वातावरण बना रहता है.
शुभता का प्रतीक
पंडित उमाचन्द्र मिश्रा बताते हैं कि मुख्य द्वार पर जूते-चप्पल उतारकर रखना या उनका ढेर लगाना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता. इससे राहु, केतु और शनि से जुड़े दोष प्रभावी हो सकते हैं. ऐसी स्थिति बनने पर परिवार में छोटी-छोटी बातों पर विवाद, तनाव, कलह और आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती हैं. इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि जूते-चप्पल मुख्य द्वार के सामने न रखे जाएं और दहलीज को हमेशा साफ रखा जाए. मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, श्री और शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिन्ह बनाना चाहिए, जिन्हें शुभता का प्रतीक माना जाता है. पंडित उमाचन्द्र के मुताबिक, बुधवार के दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की दो छोटी मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित करनी चाहिए. एक प्रतिमा मुख्य द्वार के बाहर की ओर और दूसरी अंदर की ओर लगानी चाहिए. स्थापना से पहले पंचामृत स्नान कराकर, पान, सुपारी और लड्डू का भोग अर्पित कर पूजा करें.
वास्तु दोष शांत करने का तरीका
मान्यता है कि भगवान गणेश के सामने रिद्धि-सिद्धि का वास होता है और उनके आशीर्वाद से घर में आने वाली नकारात्मकता दूर होती है. इस उपाय से पूरे वर्ष मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. व्यापार और आय में वृद्धि के योग बनते हैं, घर का वातावरण सुखद रहता है. पंडित उमाचन्द्र मिश्रा बताते हैं कि यदि किसी घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है तो वहां पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा भी लगाई जा सकती है. अन्य दिशाओं में भगवान गणेश की प्रतिमा को अधिक शुभ माना जाता है. भगवान गणेश सभी विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं और उनकी कृपा से कई प्रकार के वास्तु दोष शांत होने की मान्यता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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