सावन में करें इको-फ्रेंडली शिव पूजा, इन आसान तरीकों से कम करें कचरा और बचाएं पर्यावरण
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सावन में करें इको-फ्रेंडली शिव पूजा, सरल तरीकों से कम करें कचरा बचाएं पर्यावरण
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Eco Friendly Sawan Puja: सावन का महीना आते ही घर-घर में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और व्रत-उपवास का सिलसिला शुरू हो जाता है. मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है और लोग पूरे मन से भोलेनाथ की भक्ति में जुट जाते हैं, लेकिन इस दौरान एक ऐसी बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, जिस पर ध्यान देना आज के समय की जरूरत है. पूजा के बाद बचने वाले प्लास्टिक, पॉलीथिन, फूल-मालाएं, पैकेजिंग और दूसरे पूजा सामग्री का कचरा कई बार नदियों, तालाबों और सार्वजनिक जगहों पर पहुंच जाता है. इससे न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान होता है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी समझदारी अपनाकर सावन की पूजा को पहले जितना ही पवित्र और उससे भी ज्यादा जिम्मेदार बनाया जा सकता है.
सावन में भगवान शिव की पूजा ऐसे कैसे करें कि कचरा कम हो. (Image-AI generated)
पूजा की तैयारी में रखें सादगी का ध्यान सावन की पूजा के लिए जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने के बजाय उतनी ही सामग्री लें, जितनी वास्तव में उपयोग हो. कई बार लोग आकर्षक पैकिंग वाले पूजा किट खरीद लेते हैं, जिनमें काफी मात्रा में प्लास्टिक और बेकार पैकेजिंग होती है. इसकी जगह स्थानीय बाजार से खुली सामग्री खरीदना बेहतर विकल्प हो सकता है. मिट्टी, तांबे या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें. इससे एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक उत्पादों की जरूरत नहीं पड़ती और कचरा भी कम बनता है. (Image-AI generated)
फूल और पत्तियों का सही उपयोग करें जरूरत से ज्यादा फूल चढ़ाने से बचें भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सामान्य फूल चढ़ाए जाते हैं, लेकिन कई लोग आवश्यकता से अधिक फूल खरीद लेते हैं, जो बाद में बेकार हो जाते हैं. कम मात्रा में लेकिन श्रद्धा से अर्पित किए गए फूल भी उतने ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं. पूजा के बाद इन फूलों को कूड़ेदान में फेंकने के बजाय खाद बनाने या पौधों की जड़ों में डालने का विकल्प अपनाया जा सकता है. (Image-AI generated)
प्लास्टिक की जगह प्राकृतिक विकल्प चुनें अगर प्रसाद या पूजा सामग्री ले जानी हो तो कपड़े का थैला साथ रखें. पॉलीथिन और प्लास्टिक बैग से बचना पर्यावरण के लिए अच्छा कदम है. दीपक जलाने के लिए मिट्टी के दीपक और प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल करें, अगरबत्ती के खाली डिब्बे, प्लास्टिक रैपर और अन्य पैकेजिंग को अलग करके रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सकता है. (Image-AI generated)
जलाभिषेक करते समय पानी की बर्बादी न करें जितनी जरूरत हो, उतना ही जल चढ़ाएं भगवान शिव पर जल अर्पित करना सावन की प्रमुख परंपरा है, लेकिन कई बार जरूरत से ज्यादा पानी बहा दिया जाता है. पूजा में सीमित मात्रा में जल का उपयोग करना भी श्रद्धा का ही हिस्सा माना जा सकता है. कुछ मंदिरों में जल संग्रह की व्यवस्था भी होती है, जहां उपयोग किया गया जल पौधों की सिंचाई जैसे कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना भी अच्छी पहल है. (Image-AI generated)
प्रसाद उतना ही बनाएं जितना जरूरत हो अक्सर पूजा के बाद जरूरत से ज्यादा प्रसाद बच जाता है. इसलिए पहले से अनुमान लगाकर ही प्रसाद तैयार करें. बचा हुआ प्रसाद परिवार, पड़ोसियों या जरूरतमंद लोगों में बांटा जा सकता है, जिससे भोजन की बर्बादी भी नहीं होगी. (Image-AI generated)
पूजा के बाद सफाई भी जिम्मेदारी से करें पूजा समाप्त होने के बाद फूल, पत्तियां, राख और अन्य जैविक सामग्री को अलग रखें. वहीं प्लास्टिक, पैकेजिंग और अन्य गैर-जैविक वस्तुओं को अलग डस्टबिन में डालें. अगर मंदिर में पूजा कर रहे हैं तो वहां की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें. अपने पीछे कचरा छोड़ने के बजाय उसे निर्धारित स्थान पर डालना हर श्रद्धालु की जिम्मेदारी है. (Image-AI generated)
बच्चों को भी दें पर्यावरण का संदेश सावन की पूजा सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार सिखाने का भी अवसर है. बच्चों को बताएं कि पूजा के साथ प्रकृति का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है. जब नई पीढ़ी शुरुआत से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक होगी, तो आने वाले समय में धार्मिक आयोजन भी अधिक स्वच्छ और जिम्मेदार बनेंगे. (Image-AI generated)
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Keerti Rajpoot
मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…
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