क्या शनि ढैय्या के दौरान शादी में बढ़ जाते हैं लड़ाई-झगड़े और तलाक, ज्योतिष से जानें असली

क्या शनि ढैय्या के दौरान शादी में बढ़ जाते हैं लड़ाई-झगड़े और तलाक, ज्योतिष से जानें असली

होमफोटोधर्म

शनि ढैय्या के दौरान शादी में बढ़ जाते हैं लड़ाई-झगड़े और तलाक, जानें पूरा सच

Last Updated:

Shani Dhaiya Marriage Effects: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की ढैय्या वैवाहिक जीवन में कुछ चुनौतियां ला सकती है, लेकिन इसका परिणाम पूरी तरह व्यक्ति की जन्मकुंडली और कर्मों पर निर्भर करता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि ढैय्या भय का नहीं बल्कि आत्मसुधार, धैर्य, कर्म और जिम्मेदारी का समय है. व्यक्ति अच्छे कर्म, सत्यनिष्ठा और संयम के साथ जीवन व्यतीत करता है तो शनि देव शुभ फल भी प्रदान कर सकते हैं. आइए जानते हैं शनि की ढैय्या का शादी पर प्रभाव…

Shani Dhaiya Marriage Effects: वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय, कर्मफल, अनुशासन और धैर्य का ग्रह माना गया है. जब किसी व्यक्ति पर शनि की ढैय्या चलती है, तब उसका प्रभाव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ वैवाहिक जीवन पर भी पड़ सकता है. हालांकि, ज्योतिष शास्त्र यह भी स्पष्ट करता है कि शनि की ढैय्या हर व्यक्ति के लिए समान परिणाम नहीं देती. इसका प्रभाव जन्मकुंडली में शनि की स्थिति, सप्तम भाव (विवाह भाव), चंद्र राशि, दशा-अंतर्दशा और अन्य ग्रहों के योग पर निर्भर करता है. इस समय सिंह और धनु राशि वालों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव बना हुआ है, जो जून 2027 तक प्रभाव में रहेगी. ढैय्या सिंह राशि के आठवें भाव तो धनु राशि के चौथे भाव में मौजूद है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर ढैय्या के दौरान शनि की दृष्टि सप्तम भाव या उसके स्वामी पर पड़ रही हो और जन्मकुंडली में शनि कमजोर अथवा अशुभ स्थिति में हों, तो विवाह में विलंब की संभावना बढ़ सकती है. इस दौरान योग्य जीवनसाथी मिलने में कठिनाई, रिश्तों का बार-बार टूटना या पारिवारिक सहमति मिलने में देरी जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं. हालांकि, अगर विवाह योग मजबूत हों तो ढैय्या के दौरान भी विवाह सफलतापूर्वक संपन्न हो सकता है.

शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. अगर पति-पत्नी के रिश्ते में पहले से ही संवाद की कमी, विश्वास की समस्या या आपसी मतभेद मौजूद हों, तो ढैय्या के प्रभाव में छोटी-छोटी बातें भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं. इससे रिश्ते में तनाव, मानसिक दबाव और दूरियां बढ़ने की आशंका रहती है. लेकिन जिन दंपतियों के बीच विश्वास और समझ मजबूत होती है, वे इस समय को धैर्यपूर्वक पार कर लेते हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

शनि की ढैय्या के दौरान कामकाज, जिम्मेदारियों या मानसिक तनाव के कारण पति-पत्नी एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते. कई बार वे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे रिश्ते में भावनात्मक दूरी महसूस हो सकती है. ऐसे समय में खुलकर संवाद करना और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना अत्यंत आवश्यक माना जाता है.

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि को धीमा शिक्षक भी कहा जाता है. ढैय्या का समय व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन, जिम्मेदारी और रिश्तों की अहमियत सिखाने का अवसर देता है. अगर पति-पत्नी इस दौरान संयम, ईमानदारी और आपसी सहयोग बनाए रखें, तो उनका संबंध पहले से अधिक मजबूत होकर उभर सकता है. इसलिए हर चुनौती को नकारात्मक दृष्टि से देखने के बजाय उसे रिश्ते को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है.

यह मान लेना उचित नहीं कि शनि की ढैय्या हर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में परेशानी ही लाएगी. अगर जन्मकुंडली में शनि शुभ, उच्च या योगकारक स्थिति में हों, तो कई बार यह अवधि रिश्तों में मैच्योरिटी, जिम्मेदारी और स्थिरता भी लेकर आती है. इसलिए केवल राशि के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण आवश्यक माना जाता है.

धार्मिक दृष्टि से शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में दर्शन करना, पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना, जरूरतमंदों की सहायता करना, कौओं और काले कुत्ते को भोजन कराना तथा हनुमान जी की उपासना करना शुभ माना जाता है. साथ ही ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने की भी मान्यता है.

Source link

You May Have Missed