16 पहिये के नंदीघोष पर सवार हो निकलेंगे भगवान जगन्नाथ, जानें 3 रथों की रोचक बातें
आज 16 पहिये के रथ नंदीघोष पर निकलेंगे भगवान जगन्नाथ, जानें रोचक बातें
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Jagannath Rath Yatra 2026 Chariot Facts: आज 16 जुलाई को पुरी की रथ यात्रा का शुभारंभ है. आज भगवान जगन्नाथ 16 पहिये वाले अपने विशाल रथ नंदीघोष पर सवार होकर निकलेंगे, वहीं बलभद्र जी तालध्वज और देवी सुभद्रा दर्पदलन पर सवार होंगी. इन 3 रथों का निर्माण अक्षय तृतीया से शुरू हो जाता है. आइए जानते हैं रथ यात्रा में शामिल होने वाले इन 3 रथों के बारे में.
पुरी रथ यात्रा 2026 3 रथों की विशेषताएं.
बसंत पंचमी से होता है रथ बनाने की प्रक्रिया का आगाज
हर साल रथ यात्रा के लिए रथ बनाने का काम बसंत पंचमी के दिन से शुरू होता है. बसंत पंचमी को रथ बनाने के लिए शुभ और सही लकड़ियों का चयन होता है. इसमें नीम, धौसा, असन आदि पेड़ों की पवित्र लकड़ियां ली जाती हैं. इन लकड़ियों को दारु कहते हैं. लकड़ियों के चयन के समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि उस पेड़ पर किसी चिड़िया का घोंसला न हो. उस पर दीमक न लगे हों.
अक्षय तृतीय से शुरू होता है रथों का निर्माण
अक्षय तृतीय के दिन से रथों के निर्माण का काम शुरू होता है. मंदिर के पुजारी सोने की कुल्हाड़ी से लकड़ियों को स्पर्श करके पूजा और अन्य अनुष्ठान करते हैं, उसके बाद से कारीगर रथ बनाने का काम प्रारंभ करते हैं. इन तीनों रथों को नवजौबाना दर्शन और नेत्रोत्सव से पहले पूरा कर लिया जाता है.
रथों के निर्माण में लोहे के कीलों का उपयोग नहीं करते हैं. लकड़ी के खांचे, जोड़ और प्राकृतिक रस्सियों से जोड़कर रथों को बनाते हैं. हर रथ पर विशेष रंग का सूती कपड़ा होता है, जिसे दूर से देखकर पहचान सकते हैं कि कौन सा रथ किसका है.
भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष
भगवान जगन्नाथ 16 पहिये वाले रथ नंदीघोष पर सवार होते हैं.
- नंदीघोष रथ पर भगवान जगन्नाथ सवार होते हैं, जिसका रंग लाल और पीला होता है.
- इस रथ की ऊंचाई लगभग 45.6 फीट होती है, जिसमें 16 पहिए लगे होते हैं.
- इस रथ पर त्रिलोक्यमोहिनी ध्वज लगा होता है.
- नंदीघोष के रक्षक गरुड़ हैं और उनके सारथी दारुक हैं.
- जिस रस्सी से इस रथ का खींचते हैं, उसका नाम शंखचूड़ है.
- इस रथ में चार सफेद घोड़े शंख, बलाहक, श्वेता और हरिद्वाश जुते होते हैं.
- यह रथ तीनों में सबसे बड़ा और भारी होता है. यह सबसे पीछे चलता है.
तालध्वज रथ पर सवार भगवान बलभद्र
- भगवान बलभद्र के रथ का नाम तालध्वज है, जो यात्रा में सबसे आगे होता है. उस पर उन्नानी ध्वज लगा होता है.
- इस रथ की ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है, जिसमें 14 पहिये लगे होते हैं.
- इस रथ का रंग लाल और हरा होता है.
- भगवान बलभद्र के रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मातली हैं.
- जिस रस्सी से तालध्वज को खींचते हैं, उसका नाम वासुकी है.
- इस रथ में काले रंग के चार घोड़े तीव्र, घोर, दीर्घशर्मा और स्वर्णनाभ होते हैं.
देवी सुभद्रा के रथ दर्पदलन के सारथी हैं अर्जुन
देवी सुभद्रा 12 पहिये वाले रथ दर्पदलन पर सवार होती हैं.
- देवी सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन है, जो बीच में चलता है. इसे पद्म रथ भी कहते हैं.
- इस रथ की ऊंचाई लगभग 44.6 फीट होती है, जिसमें 12 पहिए लगे होते हैं.
- इस दर्पदलन का रंग लाल और काला होता है, जिसके रक्षक जयदुर्गा हैं. रथ पर नादंबिका ध्वज लहराता है.
- देवी सुभद्रा के सारथी का नाम अर्जुन है.
- स्वर्णचूड़ नाम की रस्सी से इस रथ को खींचा जाता है.
- इसमें लाल या भूरे रंग के चार घोड़े रोचिका, मोचिका, जिता और अपराजिता लगे होते हैं.
रथ यात्रा समापन के बाद रथों का क्या होता है?
रथ यात्रा जब खत्म हो जाती है तो इन रथों को तोड़ दिया जाता है क्योंकि हर साल यात्रा के लिए नए रथ बनाए जाते हैं. इसलिए रथों को संभालकर रखने की परंपरा नहीं है. रथों में जो घोड़े लगे होते हैं, वो भी लकड़ी के बनते हैं. रस्सों की मदद से इनको खींचते हैं.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


