आमिर खान की गिफ्ट की रूबी रिंग क्यों बनी चर्चा? जानिए माणिक पहनने की सही विधि
Ruby Stone Benefits: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने हाल ही में अपनी पत्नी गौरी स्प्रैट को एक खास रूबी (माणिक) रत्न जड़ी अंगूठी भेंट की, जिसके बाद यह अनमोल रत्न एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. बताया जा रहा है कि इस अंगूठी में मेडागास्कर से मंगाया गया दुर्लभ प्राकृतिक रूबी जड़ा है. हालांकि किसी भी रत्न का प्रभाव व्यक्ति की आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित माना जाता है. वैदिक ज्योतिष में रूबी को सूर्य का रत्न कहा गया है और इसे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, प्रतिष्ठा तथा करियर में उन्नति से जोड़कर देखा जाता है.
लेकिन केवल रत्न पहन लेना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उसे सही धातु, सही दिन और उचित विधि से धारण करना भी महत्वपूर्ण बताया गया है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार माणिक पहनने के लाभ, इसकी पहचान और इसे धारण करने की पूरी विधि.
रूबी यानी माणिक को क्यों माना जाता है खास?
वैदिक ज्योतिष में माणिक का संबंध सूर्य ग्रह से माना गया है. सूर्य को आत्मबल, नेतृत्व, सम्मान और प्रशासनिक क्षमता का कारक माना जाता है. यही वजह है कि जिन लोगों की कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में होता है या जिन्हें सूर्य को मजबूत करने की सलाह दी जाती है, उनके लिए माणिक धारण करना लाभकारी माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यता है कि सही तरीके से पहना गया रूबी व्यक्ति के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव ला सकता है. खासकर ऐसे लोग जो सार्वजनिक जीवन, प्रशासन, राजनीति, शिक्षा या नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों में काम करते हैं, उनके लिए इसे शुभ रत्न माना जाता है.
रूबी पहनने से क्या लाभ मिलते हैं?
ज्योतिष के अनुसार माणिक धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है. इससे समाज और कार्यक्षेत्र में सम्मान मिलने की संभावना बढ़ती है.
करियर और भाग्य को मिल सकता है सहारा
मान्यता है कि यह रत्न करियर में नई संभावनाएं खोलने, सरकारी कार्यों में सहयोग मिलने और पद-प्रतिष्ठा बढ़ाने में सहायक हो सकता है. कई लोग इसे भाग्योदय से भी जोड़कर देखते हैं.
संतान सुख और तेज में वृद्धि
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार माणिक धारण करने से संतान सुख, व्यक्तित्व का तेज और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होने की मान्यता है.
स्वास्थ्य से जुड़े पारंपरिक दावे
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार माणिक को हृदय संबंधी परेशानियों, घबराहट, रक्त विकार और शारीरिक कमजोरी में लाभकारी माना जाता है. हालांकि इन दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है.
असली रूबी की पहचान कैसे करें?
रत्न खरीदते समय उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. असली माणिक आमतौर पर गहरे लाल रंग का, पारदर्शी और प्राकृतिक चमक वाला होता है. ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार इसे हथेली पर रखने पर हल्की गर्माहट महसूस हो सकती है और इसका वजन सामान्य पत्थरों की तुलना में थोड़ा अधिक लगता है. कुछ पारंपरिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि कांच के पात्र में रखने पर इसकी लाल आभा दिखाई देती है या दूध में रखने पर हल्का गुलाबी प्रभाव नजर आता है. हालांकि किसी भी रत्न की प्रामाणिकता की पुष्टि केवल प्रमाणित जेमोलॉजिकल लैब से ही करानी चाहिए.
किन लोगों के लिए शुभ माना जाता है माणिक?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए रूबी शुभ मानी जाती है. इसके अलावा जिन लोगों की जन्म कुंडली में सूर्य योगकारक हो या सूर्य को मजबूत करने की आवश्यकता हो, उन्हें योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद माणिक धारण करने की सलाह दी जाती है. हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए बिना परामर्श के कोई भी रत्न पहनना उचित नहीं माना जाता.
रूबी पहनने की सही विधि
रविवार को धारण करना माना जाता है शुभ
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार माणिक को रविवार के दिन सूर्य की होरा में पहनना सबसे शुभ माना जाता है.
सोना या तांबे की अंगूठी में जड़वाएं
रूबी को सोने या तांबे की अंगूठी में जड़वाकर पहनने की सलाह दी जाती है. इन धातुओं को सूर्य की ऊर्जा से संबंधित माना गया है.
इन नक्षत्रों में मिलता है विशेष फल
कृतिका, उत्तराफाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में माणिक धारण करना विशेष शुभ माना जाता है.
मंत्र के साथ करें धारण
माणिक पहनने से पहले सूर्य के बीज मंत्र ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ का जाप कर रत्न को अभिमंत्रित करने की परंपरा है. इसके बाद गायत्री मंत्र का जप, सूर्य पूजा और यथाशक्ति हवन करने की भी मान्यता है.
किस उंगली में पहनें?
ज्योतिष के अनुसार माणिक की अंगूठी दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना सबसे शुभ माना जाता है.
ध्यान रखें यह जरूरी बात
रत्नों का प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होता है और हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं माना जाता. इसलिए केवल किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को देखकर रत्न धारण करने के बजाय अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर ही निर्णय लेना बेहतर माना जाता है. सही सलाह के साथ पहना गया रत्न ही अपेक्षित परिणाम देने वाला माना जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


