पड़ा जाओगे बीमार, टूट जाएगी शादी…पुखराज पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम
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Pukhraj Benefits : क्या आप भी पुखराज पहनते हैं या पहनने के बारे में सोच रहे हैं? मान्यता है कि यह रत्न भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है. लेकिन अक्सर लोग गलती कर बैठते हैं और उन्हें कोई लाभ नहीं होता. अयोध्या के पंडित कल्कि राम लोकल 18 से बताते हैं कि गलत पुखराज धारण करने पर आर्थिक प्रगति में रुकावट, वैवाहिक समस्याएं या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां महसूस हो सकती हैं. इसे सोने की अंगूठी में जड़वाना सबसे उत्तम माना जाता है. पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन शुभ मुहूर्त में धारण करें. इसे धारण करने से कई कामों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.
अयोध्या. वैदिक ज्योतिष में पुखराज को गुरु ग्रह का प्रमुख रत्न माना गया है. मान्यता है कि यह रत्न भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है. ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में गुरु शुभ स्थिति में हों या जिन्हें गुरु को मजबूत करने की सलाह दी गई हो, उनके लिए पुखराज बेहद लाभकारी है. विशेष रूप से धनु और मीन राशि के जातकों के लिए यह रत्न शुभ माना जाता है, क्योंकि इन दोनों राशियों के स्वामी गुरु ग्रह हैं. हालांकि बिना किसी योग्य ज्योतिषीय सलाह के पुखराज धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए यह समान रूप से लाभदायक नहीं होता.
इस मंत्र को पढ़ते हुए पहनना शुभ
अयोध्या के पंडित कल्कि राम लोकल 18 से बताते हैं कि पुखराज को गुरुवार के दिन शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए. इसे सोने की अंगूठी में जड़वाना सबसे उत्तम माना जाता है. पहनने से एक रात पहले रत्न को पंचामृत में रखकर शुद्ध किया जाता है. गंगाजल, कच्चा दूध, शहद और घी से इसका अभिषेक करने की भी परंपरा है. गुरुवार की सुबह स्नान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें, रत्न पर हल्दी का तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करें. इसके बाद “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करते हुए दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में अंगूठी धारण करें. मान्यता है कि इस दिन पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ फलदायी होता है.
क्रोध में कमी, साहस में वृद्धि
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुखराज समृद्धि, ज्ञान, स्वास्थ्य, दीर्घायु और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है. यह आत्मविश्वास बढ़ाने, निर्णय क्षमता मजबूत करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक है. कई लोग मानते हैं कि इसे धारण करने से करियर, शिक्षा और विवाह से जुड़े कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. क्रोध में कमी, सकारात्मक सोच और साहस में वृद्धि होने की भी मान्यता है. हालांकि इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इन्हें धार्मिक-परंपरागत मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
कब नहीं मिलता लाभ?
यदि पुखराज व्यक्ति की कुंडली के अनुरूप न हो या नकली अथवा दोषयुक्त रत्न पहन लिया जाए, तो अपेक्षित लाभ नहीं मिलते. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गलत पुखराज धारण करने पर आर्थिक प्रगति में रुकावट, वैवाहिक समस्याएं या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां महसूस हो सकती हैं. इसलिए रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना उचित माना जाता है.
कैसा पहचाने असली-नकली
अच्छी गुणवत्ता वाला पुखराज हल्के से गहरे पीले रंग का, पारदर्शी, चमकदार और बिना धब्बों या दरारों के होना चाहिए. हाथ में लेने पर यह अपेक्षाकृत वजनी महसूस होता है. पीली कनेर, चंपा या अमलतास के फूल जैसा आकर्षक पीला रंग, चिकनी सतह और प्राकृतिक चमक वाला पुखराज श्रेष्ठ माना जाता है. विश्वसनीय विक्रेता से प्रमाणित प्राकृतिक रत्न खरीदना हमेशा बेहतर होता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


