सावन में जलाभिषेक के बाद बचा जल कहां डालें? 99% लोग कर बैठते हैं गलती, जानिए सही जगह

सावन में जलाभिषेक के बाद बचा जल कहां डालें? 99% लोग कर बैठते हैं गलती, जानिए सही जगह

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Sawan Astro Tips : सावन का महीना भगवान शिव के सबसे निकट है. श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं. अक्सर जलाभिषेक के बाद बचा पात्र में जल बच जाता है. कई लोग गलतियां भी कर देते हैं, जो आपको नहीं करनी है. लोकल 18 से ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि कई लोग इसे सामान्य पानी की तरह कहीं भी फेंक देते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं है. इस पवित्र जल को नाली, शौचालय या किसी गंदी जगह पर तो बिल्कुल नहीं डालना चाहिए.

ऋषिकेश. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस पूरे महीने में लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. पूजा के दौरान एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जलाभिषेक के बाद बचा हुआ जल कहां डालना चाहिए. कई लोग इसे सामान्य पानी की तरह कहीं भी फेंक देते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता. माना जाता है कि पूजा में उपयोग किया गया जल पवित्र हो जाता है, इसलिए उसका सम्मानपूर्वक विसर्जन करना चाहिए.

न करें ये काम

लोकल 18 से ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जलाभिषेक के बाद बचा हुआ जल किसी साफ-सुथरे पौधे, तुलसी के पौधे या ऐसे वृक्ष की जड़ों में अर्पित किया जा सकता है, जिसे नियमित रूप से पानी दिया जाता हो. ऐसा करना प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है. यदि आपके घर में बगीचा है तो वहां भी इस जल का उपयोग किया जा सकता है. इस पवित्र जल को नाली, शौचालय या किसी गंदी जगह पर नहीं डालना चाहिए.

नदी या तालाब न मिले तब?

ज्योतिषी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि अगर जलाभिषेक गंगाजल से किया गया है तो उसे किसी स्वच्छ जल स्रोत में प्रवाहित करना भी शुभ माना जाता है. यदि नदी या तालाब में जल प्रवाहित करना संभव न हो, तो घर के किसी साफ पौधे में अर्पित करना बेहतर विकल्प है. सावन के दौरान वास्तु शास्त्र घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने पर भी विशेष जोर देता है. इस महीने घर के मंदिर की नियमित सफाई करें और पूजा का स्थान हमेशा स्वच्छ रखें. पूजा के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान दिशा को सबसे शुभ माना जाता है. यदि संभव हो तो शिवलिंग या भगवान शिव के परिवार की तस्वीर इसी दिशा में स्थापित करें. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति बनी रहती है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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