जुलाई के पहले दिन बन रहा अजीब संयोग! इस दिशा में ना करें यात्रा, खीर, पान समेत ये चीजें ना
जुलाई के पहले दिन बन रहा अजीब संयोग! इस दिशा में ना करें यात्रा, खीर, पान समेत
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Kal Ka Shubh Ashubh Muhurat 2026: जुलाई के पहले दिन यात्रा करने से पहले सावधान! एक विशेष दिशा में यात्रा करना अशुभ हो सकता है. पूजा के लिए आपके पास केवल 56 मिनट का समय होगा, इसलिए अपनी तैयारी पहले से कर लें. इस दिन क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, यह जानना भी महत्वपूर्ण है ताकि आप किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बच सकें. अपनी यात्रा और पूजा को सफल बनाने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें…
Kal Ka Shubh Ashubh Muhurat 2026: जुलाई महीने का पहला दिन धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण संयोग लेकर आ रहा है क्योंकि इस दिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा उपरांत द्वितीया तिथि है. ऐसे में अगर आप 1 जुलाई को यात्रा या शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो पंचांग के अनुसार दिन की शुभ-अशुभ स्थितियों की जानकारी पहले जरूर जान लें. इस दिन दिशाशूल का विशेष प्रभाव एक दिशा में माना गया है, इसलिए उस ओर यात्रा करने से पहले परंपरागत नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है. वहीं पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए केवल 56 मिनट का अत्यंत शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा. इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन क्या खाना शुभ माना गया है और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, यह जानना भी महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं 1 जुलाई का संपूर्ण धार्मिक पंचांग और दिनभर के शुभ-अशुभ योग…
आषाढ़ महीने का दूसरा दिन
1 जुलाई दिन बुधवार को आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 7:38 बजे प्रतिपदा तिथि है. इसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी. यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है और आषाढ़ महीने का दूसरा दिन है. बुधवार को रात 2:20 बजे से अगली सुबह तड़के 4:06 बजे तक अमृत काल रहेगा, जबकि सुबह 4:12 से 5:00 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इस दिन सुबह 5:48 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा.
1 जुलाई के शुभ योग
पंचांग के अनुसार 1 जुलाई 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं. चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेगा (जो सुबह तक प्रभावी रहेगा), उसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा. वहीं, 1 जुलाई यानी कल हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा. इस दिन ऐंद्र योग और वैधृति योग का संयोग बन रहा है.
1 जुलाई का शुभ मुहूर्त
बुधवार को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:47 तक रहेगा, यानी 56 मिनट तक आपको पूजा के लिए शुभ समय मिलने वाला है. यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है. इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है. वहीं, 1 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा धनु राशि में संचार करने वाले हैं.
1 जुलाई का अशुभ मुहूर्त
1 जुलाई को राहुकाल दोपहर 12:24 बजे से लेकर दोपहर 02:09 बजे तक रहेगा, गुलिक काल दोपहर 12:24 से 2:08 बजे तक रहेगा, और सुबह 8:56 से 10:40 बजे तक यमगंड रहेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है. रात 8:32 बजे चन्द्रोदय और सुबह 7:31 बजे चन्द्रास्त होगा.
1 जुलाई को इस दिशा में यात्रा करने से बचें
ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, 1 जुलाई को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन उत्तर दिशा की यात्रा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए. अगर यात्रा टालना संभव ना हो, तो परंपरा के अनुसार धनिया खाकर या हरे रंग की वस्तु का दर्शन करके घर से निकलना शुभ माना जाता है. साथ ही घर से पहला पैर बाहर रखने से पहले गणेशजी का स्मरण जरूर करें. यह मान्यता धार्मिक परंपराओं पर आधारित है और इसका उद्देश्य यात्रा को मंगलमय बनाने की कामना करना है.
बुधवार के दिन क्या खाएं क्या ना खाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित माना जाता है. इस दिन दूध को जलाकर बनाई जाने वाली मिठाई जैसे रबड़ी या खीर घर में नहीं बनानी चाहिए. साथ ही इस दिन पान का खाना वर्जित माना गया है. बुधवार के दिन साग या हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खानी चाहिए. साथ ही इस दिन बिना नमक भोजन करने की सलाह दी जाती है. हरी मूंग की दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल और सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है. वहीं ताजे और हल्के भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इस दिन मांसाहार, शराब, तामसिक भोजन और बासी भोजन से परहेज करना चाहिए.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


