ज्येष्ठ पूर्णिमा पर अमरनाथ यात्रा की प्रथम पूजा, गर्मी से 40 फीसदी पिघला हिमलिंग, जानें या

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर अमरनाथ यात्रा की प्रथम पूजा, गर्मी से 40 फीसदी पिघला हिमलिंग, जानें या

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पूर्णिमा पर अमरनाथ यात्रा की प्रथम पूजा, गर्मी से 40 फीसदी पिघला हिमलिंग

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Amarnath Yatra Pratham Puja 2026: अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है. बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है, लेकिन इस बार बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण हिमलिंग पहले ही करीब 40 प्रतिशत तक पिघल चुका है. ऐसे में यात्रा के शुरुआती दिनों में दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास माना जा रहा है. आइए जानते हैं धार्मिक यात्रा का महत्व…

Amarnath Yatra Pratham Puja 2026: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ज्येष्ठ पूर्णिमा या वट पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 29 जून दिन सोमवार को है. ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र अमरनाथ गुफा में प्रथम पूजा की जाएगा. हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रथम पूजा हो जाने के बाद 57 दिवसीय वार्षिक यात्रा का औपचारिक आगाज हो जाता है. अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 रक्षाबंधन के दिन तक चलेगी. बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इस बीच यात्रा पर जाने की योजना बना रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है. रिपोर्टों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला पवित्र हिम शिवलिंग गर्मी के कारण आंशिक रूप से पिघल गया है, जिससे उसका आकार पहले की तुलना में छोटा दिखाई दे रहा है.

3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ यात्रा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है और यात्रा का समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा. बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है, लेकिन इस बार बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण हिमलिंग पहले ही करीब 40 प्रतिशत तक पिघल चुका है. ऐसे में यात्रा के शुरुआती दिनों में दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास माना जा रहा है.

40 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका हिमलिंग – राहत की बात यह है कि भीषण गर्मी के बावजूद पवित्र हिमलिंग पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए अभी भी मौजूद है. हर वर्ष अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला यह हिमलिंग मौसम और तापमान के अनुसार आकार बदलता रहता है. इसी कारण इसके आकार में कमी आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया भी मानी जाती है. बताया जा रहा है कि हिमलिंग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका है.

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पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं भक्त – रिपोर्ट के अनुसार, यात्रा शुरू होने के बाद गुफा के आसपास श्रद्धालुओं और सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय तापमान में वृद्धि हो सकती है. ऐसे में आने वाले दिनों में हिमलिंग के आकार में और कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है. अब तक 3.75 लाख से अधिक श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं. अनुमान है कि इस बार 5 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं. हर साल देश-विदेश से लाखों शिवभक्त कठिन पर्वतीय मार्ग तय कर पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं और प्राकृतिक हिम शिवलिंग के दर्शन करते हैं.

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अमरनाथ यात्रा का महत्व – अमरनाथ यात्रा को हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था. यही कारण है कि इस यात्रा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. विशेषज्ञों का कहना है कि हिमलिंग का आकार पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों, विशेष रूप से तापमान और मौसम पर निर्भर करता है. इसलिए श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए और यात्रा से पहले मौसम, सुरक्षा तथा प्रशासनिक दिशा-निर्देशों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए.

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