अंतिम यात्रा में ही क्यों बोला जाता है ‘राम नाम सत्य है’? वजह जानकर सोच में पड़ जाएंगे

अंतिम यात्रा में ही क्यों बोला जाता है ‘राम नाम सत्य है’? वजह जानकर सोच में पड़ जाएंगे

Antyeshti Sanskar: किसी भी इंसान के जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई मृत्यु मानी जाती है. जन्म लेने वाला हर व्यक्ति एक दिन इस संसार को छोड़कर चला जाता है. सनातन धर्म में मृत्यु के बाद होने वाले अंतिम संस्कार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. यही वजह है कि अंत्येष्टि से जुड़ी हर परंपरा के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक, सामाजिक या व्यावहारिक संदेश छिपा होता है. ऐसी ही एक परंपरा है शवयात्रा के दौरान “राम नाम सत्य है” का उच्चारण करना. यह वाक्य लगभग हर हिंदू अंतिम यात्रा में सुनाई देता है, लेकिन बहुत कम लोग इसके वास्तविक अर्थ और महत्व को जानते हैं.

अंतिम यात्रा में क्यों गूंजता है ‘राम नाम सत्य है’?
जब किसी व्यक्ति का निधन होता है और उसे श्मशान घाट ले जाया जाता है, तब शवयात्रा में शामिल लोग लगातार “राम नाम सत्य है” का जाप करते चलते हैं. पहली नजर में यह एक धार्मिक परंपरा लग सकती है, लेकिन इसके पीछे जीवन का गहरा दर्शन छिपा हुआ है.

दरअसल, यह वाक्य मृत व्यक्ति से ज्यादा उन लोगों के लिए कहा जाता है जो अभी जीवित हैं. इसका सीधा संदेश है कि इस संसार में केवल ईश्वर और सत्य ही स्थायी हैं. धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा और शरीर सब एक दिन नष्ट हो जाते हैं. ऐसे में मनुष्य को अपने जीवन की वास्तविकता समझनी चाहिए.

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से मिलता है संदेश
मृत्यु को देखकर भी इंसान भूल जाता है सच्चाई
महाभारत के वनपर्व में यक्ष और धर्मराज युधिष्ठिर के बीच हुआ संवाद जीवन और मृत्यु के रहस्य को समझाने वाला माना जाता है. जब यक्ष ने युधिष्ठिर से संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य पूछा, तब उन्होंने उत्तर दिया कि रोजाना लोग दूसरों को मरते हुए देखते हैं, फिर भी खुद को अमर समझते हैं. ह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है. किसी की शवयात्रा में शामिल होते समय “राम नाम सत्य है” सुनकर लोगों को याद दिलाया जाता है कि मृत्यु अटल है और सांसारिक मोह-माया हमेशा साथ नहीं रहने वाली.

क्या यह मृतक की आत्मा के लिए भी महत्वपूर्ण है?
आत्मा की शांति से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा अपने परिवार और परिचित वातावरण के आसपास रहती है. ऐसे में भगवान राम के नाम का जाप उसे मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है. मान्यता है कि यह पवित्र ध्वनि आत्मा को सांसारिक बंधनों से मुक्त होने में सहायता करती है और उसे आगे की यात्रा के लिए प्रेरित करती है. यही कारण है कि अंतिम संस्कार के दौरान भगवान का स्मरण विशेष रूप से किया जाता है.

राम नाम को क्यों माना गया सुरक्षा कवच?
शास्त्रों में मिलता है उल्लेख
कुछ तांत्रिक और धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि मृत्यु के बाद शरीर निष्क्रिय हो जाता है. ऐसी स्थिति में नकारात्मक शक्तियों या अशुभ प्रभावों से बचाव के लिए ईश्वर के नाम का जाप लाभकारी माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, “राम” नाम का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनाता है. इसी वजह से अंतिम यात्रा के दौरान लगातार राम नाम का स्मरण किया जाता है ताकि मृतक की यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सके.

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जीवित लोगों के लिए भी है बड़ा संदेश
मोह-माया से बाहर निकलने की सीख
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग धन, करियर, संपत्ति और सामाजिक प्रतिष्ठा के पीछे लगातार दौड़ते रहते हैं. लेकिन जब किसी की अंतिम यात्रा निकलती है, तब यह दृश्य जीवन की वास्तविकता सामने ला देता है. “राम नाम सत्य है” केवल एक धार्मिक नारा नहीं बल्कि जीवन का सार है. यह बताता है कि इंसान चाहे जितनी उपलब्धियां हासिल कर ले, अंत में सब कुछ यहीं रह जाता है. साथ जाता है तो केवल उसके कर्म और उसकी आध्यात्मिक चेतना.

आज भी क्यों कायम है यह परंपरा?
समय बदल गया है, जीवनशैली बदल गई है, लेकिन अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराएं आज भी वैसी ही बनी हुई हैं. इसकी वजह यह है कि ये परंपराएं केवल धार्मिक रस्में नहीं बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी हैं. जब शवयात्रा में “राम नाम सत्य है” की आवाज गूंजती है, तो वह लोगों को कुछ पल के लिए रुककर जीवन के अर्थ पर सोचने के लिए मजबूर कर देती है. यही इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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