आज रात से मां कामाख्या के रजस्वला काल की शुरुआत, 3 दिन कपाट रहेंगे बंद, जानें तंत्र साधना
आज से मां कामाख्या के रजस्वला काल की शुरुआत, 3 दिन कपाट रहेंगे बंद, जानें
Last Updated:
Ambubachi Mela Kamakhya Temple: हर वर्ष आषाढ़ माह में आयोजित होने वाले अंबुवाची मेले की आज से शुरुआत हो गई है और इस मेले का समापन 26 जून को होगा. अंबुवाची मेले के दौरान माना जाता है कि मां कामाख्या तीन दिनों तक रजस्वला होती हैं और यह अवधि बहुत पवित्र मानी जाती है. इस अवधि में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और हर दिन की पूजा-अर्चना भी स्थगित कर दी जाती है. आइए जानते हैं अंबुवाची मेले के बारे में सबकुछ…
Ambubachi Mela Kamakhya Temple 2026: पूर्वी भारत के सबसे बड़े और अहम धार्मिक आयोजनों में से एक, सालाना अंबुवाची मेला सोमवार को मशहूर कामाख्या मंदिर में शुरू होने जा रहा है और इसका समापन 26 जून को होगा. चार दिन तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से आठ लाख से अधिक श्रद्धालु, तीर्थयात्री, साधु और पर्यटक शामिल होने की उम्मीद अधिकारियों ने जताई है. मंदिर प्रशासन ने बताया कि 22 जून को रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान के साथ मेले की शुरुआत होगी. इसी के साथ मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) काल की शुरुआत मानी जाएगी.

वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव – नारी शक्ति और प्रजनन क्षमता के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला अंबुबाची मेला, देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव है. देवी कामाख्या को दैवीय स्त्री रचनात्मक ऊर्जा (सृजन शक्ति) का साक्षात् स्वरूप माना जाता है. यह त्योहार भारत में शक्ति उपासना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक है, जिसका तांत्रिक परंपराओं को मानने वालों के बीच विशेष महत्व है.

आज रात से शुरू होगी प्रकिया – कामाख्या मंदिर प्रशासन के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत सोमवार रात 9:08:42 बजे ‘प्रवृत्ति’ समारोह के साथ होगी, जो इस पवित्र समय की शुरुआत का प्रतीक है. अनुष्ठान शुरू होने के बाद मंदिर के दरवाजे तीन दिनों तक बंद रहेंगे और इस दौरान भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी. मंदिर 26 जून की सुबह ‘निवृत्ति’ अनुष्ठान और पारंपरिक नित्य पूजा पूरी होने के बाद फिर से खुलेगा. इसके बाद भक्तों को मंदिर में पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने की अनुमति दी जाएगी.
Add News18 as
Preferred Source on Google

51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या मंदिर – नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसे हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है. तीन दिनों की इस अवधि के दौरान मंदिर के भीतर सभी धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं, जो देवी के मासिक धर्म के दौरान पालन किए जाने वाले एकांतवास का प्रतीक है. जब मंदिर के दरवाजे फिर से खुलेंगे, तो पवित्र ‘अंगोदक’ और ‘अंगवस्त्र’ प्राप्त करने के लिए हजारों भक्तों के जुटने की उम्मीद है, जिन्हें श्रद्धालु बहुत शुभ मानते हैं.

सबसे पवित्र त्योहारों में से एक – हर साल, अंबुवाची मेला गुवाहाटी को धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के एक जीवंत केंद्र में बदल देता है, जिससे लाखों तीर्थयात्री, साधु-संत और आध्यात्मिक साधक यहां खिंचे चले आते हैं. तैयारियां पूरी होने के साथ ही, अधिकारी इस ऐतिहासिक मंदिर में एक और विशाल जमावड़े की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि भक्त देवी शक्ति को समर्पित सबसे पवित्र त्योहारों में से एक को मनाने के लिए यहां एकत्र हो रहे हैं.

कामाख्या मंदिर तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र – कामाख्या मंदिर को तंत्र साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां देवी सती का योनिभाग गिरा था, जिसके कारण यह शक्तिपीठ विशेष महत्व रखता है.os कामाख्या मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा देवी के रजस्वला होने से जुड़ी है. हर वर्ष आषाढ़ माह में आयोजित होने वाले अंबुवाची मेला के दौरान माना जाता है कि मां कामाख्या तीन दिनों तक रजस्वला होती हैं.

दिव्य शक्ति के जागरण का काल – तांत्रिक परंपराओं में रजस्वला अवस्था को सृजन शक्ति, उर्वरता और प्रकृति के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है. तंत्र शास्त्र के अनुसार यह समय देवी की दिव्य शक्ति के जागरण का काल होता है, इसलिए देश-विदेश से तांत्रिक, साधक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. तीन दिन बाद मंदिर के कपाट खुलने पर विशेष पूजा की जाती है तथा श्रद्धालुओं को देवी का प्रसाद और पवित्र वस्त्र वितरित किया जाता है. यह परंपरा स्त्री शक्ति, सृजन और प्रकृति के चक्र के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है.


