दक्षिण भारत का रहस्यमयी नारायण मंदिर, दोपहर में भी नहीं पड़ती इस मंदिर के शिखर की परछाई
Koodal Azhagar Temple: भारत के मंदिर सिर्फ आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि अपने भीतर इतिहास, पौराणिक कथाएं और हैरान कर देने वाली वास्तुकला भी समेटे हुए हैं. दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के मदुरै शहर में मौजूद कूडल अझगर मंदिर भी ऐसा ही एक अद्भुत तीर्थ है, जो सदियों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता आ रहा है. भगवान विष्णु को समर्पित यह प्राचीन मंदिर अपनी दिव्यता के साथ-साथ एक ऐसे रहस्य के लिए भी मशहूर है, जिसने लोगों को हमेशा चौंकाया है. कहा जाता है कि मंदिर के अष्टांग विमान यानी आठ हिस्सों वाले शिखर की परछाई दोपहर के समय जमीन पर दिखाई नहीं देती.
इस अनोखी वास्तुकला को देखने के लिए देश-विदेश से लोग यहां पहुंचते हैं. पुरुषोत्तम मास में भगवान नारायण की पूजा का खास महत्व माना जाता है, ऐसे में कूडल अझगर मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है. आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर का इतिहास, इसकी खासियत, पौराणिक मान्यताएं और यहां पहुंचने का आसान तरीका.
दक्षिण भारत का अनोखा कूडल अझगर मंदिर
तमिलनाडु के मदुरै शहर के बीचों-बीच स्थित कूडल अझगर मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. “कूडल” का मतलब है मिलन और “अझगर” का अर्थ है सुंदर. इस तरह कूडल अझगर का मतलब हुआ “सुंदर भगवान”, जो भक्तों को अपने दिव्य रूप में दर्शन देते हैं. करीब 600 साल से भी ज्यादा पुराना यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय के 108 दिव्य देशमों में शामिल है. यहां भगवान विष्णु कूडल अझगर के रूप में विराजमान हैं. मंदिर का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि सालभर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है.
शिखर की परछाई क्यों नहीं दिखती?
कूडल अझगर मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका अष्टांग विमान है. यह आठ स्तरों वाला शिखर प्राचीन भारतीय वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, दोपहर के समय इस शिखर की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती. यह दावा लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि शिखर की बनावट, उसकी ऊंचाई और सूर्य की दिशा को ध्यान में रखकर इसे खास तरीके से तैयार किया गया होगा. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि वास्तुकला के शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का विषय बना हुआ है.
पांड्य राजाओं के दौर की विरासत
कूडल अझगर मंदिर का इतिहास पांड्य राजाओं के शासनकाल से जुड़ा है. बाद में विजयनगर साम्राज्य और मदुरै नायक शासकों ने मंदिर का विस्तार कराया और इसकी भव्यता को और बढ़ाया. मंदिर ऊंची ग्रेनाइट की दीवारों से घिरा हुआ है. इसका पांच मंजिला राजगोपुरम बेहद आकर्षक है, जिस पर दशावतार, लक्ष्मी-नारायण, लक्ष्मी-नरसिंह और कई देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी की गई है. मंदिर परिसर में नवग्रह मंडप के साथ श्रीराम, श्रीकृष्ण और अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी मौजूद हैं. यहां की दीवारों पर प्राचीन तमिल साहित्य जैसे सिलप्पादिकारम, परिपाडल और मदुरै कांची से जुड़े शिलालेख भी देखे जा सकते हैं.
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
कूडल अझगर मंदिर से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं. सबसे प्रसिद्ध कथा के मुताबिक, राक्षस सोमका ने ब्रह्माजी से चारों वेद चुरा लिए थे. तब भगवान विष्णु ने कूडल अझगर रूप में अवतार लेकर राक्षस का वध किया और वेदों को वापस ब्रह्माजी को सौंपा.
मान्यता है कि इस घटना का उल्लेख ब्रह्मांड पुराण में भी मिलता है.
एक दूसरी कथा बारह अलवार संतों में से एक पेरियालवार से जुड़ी है. कहा जाता है कि उन्होंने पांड्य राजा के दरबार में भगवान विष्णु की महिमा का गुणगान किया था. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान कूडल अझगर प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया. इसी वजह से यह मंदिर वैष्णव भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है.
कैसे पहुंचें कूडल अझगर मंदिर?
मदुरै शहर देश के प्रमुख शहरों से सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. मदुरै रेलवे जंक्शन से मंदिर की दूरी करीब 1 किलोमीटर है. मदुरै बस स्टैंड से भी मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है. मदुरै एयरपोर्ट मंदिर से लगभग 14 किलोमीटर दूर है. रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से ऑटो, टैक्सी और लोकल बस की सुविधा आसानी से मिल जाती है.
कूडल अझगर मंदिर आस्था, इतिहास और अनोखी वास्तुकला का शानदार संगम है. इसके शिखर से जुड़ा रहस्य, प्राचीन पौराणिक कथाएं और सदियों पुरानी विरासत इसे दक्षिण भारत के सबसे खास विष्णु मंदिरों में शामिल करती हैं, अगर आप धार्मिक यात्रा के साथ किसी अद्भुत स्थापत्य को करीब से देखना चाहते हैं, तो मदुरै का यह मंदिर आपकी यात्रा सूची में जरूर होना चाहिए.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


