आज का शुक्र प्रदोष है बेहद खास, शुभ समय में सरल विधि से करें शिव पूजा

आज का शुक्र प्रदोष है बेहद खास, शुभ समय में सरल विधि से करें शिव पूजा

Shukra Pradosh 2026: जून माह का पहला प्रदोष व्रत आज श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व लेकर आया है. शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. भगवान शिव की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है और इस बार इसकी खास बात यह है कि प्रदोष व्रत के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ऐसे दुर्लभ योग में की गई शिव पूजा और व्रत साधना कई गुना अधिक फलदायी मानी जाती है.

अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष माना जाता है जो जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की कामना रखते हैं. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं. यही वजह है कि देशभर के शिव मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की जाती हैं.

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
आज यानी 12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत के अवसर पर भगवान शिव की पूजा के लिए कुल 1 घंटा 44 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. प्रदोष काल में पूजा का मुहूर्त शाम 7 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद इसी काल में की जाती है. मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर आनंदमय मुद्रा में तांडव करते हैं. इसलिए इस समय की गई आराधना को विशेष पुण्यदायी माना जाता है. कई श्रद्धालु इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं.

दिनभर के अन्य शुभ योग और मुहूर्त
शुक्र प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक रहेगा. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा. निशिता मुहूर्त मध्यरात्रि 12:01 बजे से 13 जून की रात 12:41 बजे तक माना गया है. इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है, जो सुबह 5:23 बजे से शुरू होकर 6:28 बजे तक रहेगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और शुभ संकल्पों के लिए अनुकूल माना जाता है.

इसके अलावा अतिगण्ड योग रात 9:26 बजे तक रहेगा, जिसके बाद सुकर्मा योग प्रारंभ होगा. अश्विनी नक्षत्र सुबह 6:28 बजे तक प्रभावी रहेगा, जबकि इसके बाद भरणी नक्षत्र का प्रवेश होगा जो अगले दिन तड़के तक रहेगा.

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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं. एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है. सप्ताह के जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी के आधार पर उसका नाम निर्धारित होता है. शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शुक्र प्रदोष कहलाता है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि प्रदोष व्रत करने और विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है तथा जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं. यही कारण है कि नौकरी, व्यापार, विवाह, संतान और स्वास्थ्य संबंधी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी लोग इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करते हैं.

पूजा के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
प्रदोष व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक कर बेलपत्र, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करें. शिव मंत्रों का जप और शिव चालीसा का पाठ भी शुभ माना जाता है. पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए.

सुबह की पूजा विधि
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. स्वच्छ या हल्के रंग के कपड़े पहनें और घर के मंदिर की सफाई करें.
2. भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प करें
3. शिवलिंग या शिवजी की तस्वीर पर गंगाजल अर्पित करें, चंदन, अक्षत और सफेद फूल चढ़ाएं और 3, 5 या 11 बेलपत्र अर्पित करें.
4. धूप और दीप जलाएं, कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.
5. इसके बाद शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ करें.
6. संभव फलाहार या उपवास रखें, सात्विक व्यवहार करें किसी की निंदा, झूठ या क्रोध से बचें.

शाम की प्रदोष काल पूजा विधि
प्रदोष काल की पूजा ही इस व्रत का मुख्य भाग मानी जाती है. इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 7:36 बजे से रात 9:40 बजे तक है.

1. पूजा की तैयारी
पूजा स्थान पर रखें: गंगाजल, शुद्ध जल, पंचामृत, बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन, धूप, दीप, फल और मिठाई, कपूर

2. शिवलिंग का अभिषेक
सबसे पहले शिवलिंग पर क्रमशः: गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर से अभिषेक करें. इसके बाद फिर स्वच्छ जल अर्पित करें. अभिषेक के दौरान लगातार “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
3. श्रृंगार और अर्पण – चंदन लगाएं, बेलपत्र चढ़ाएं, सफेद फूल अर्पित करें, धतूरा और भांग उपलब्ध हो तो चढ़ा सकते हैं, फल और मिष्ठान का भोग लगाएं.
4. माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें. लाल या पीले फूल चढ़ाएं और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.
5. कम से कम 108 बार ॐ नमः शिवाय

या

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ का जाप करें.

6. प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या सुनें, कथा के बाद भगवान शिव-पार्वती की आरती करें.
7. आरती और प्रार्थना परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें.
व्रत पारण कब करें?

यदि आपने पूरे दिन उपवास रखा है, तो अगले दिन स्नान और पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें.

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