भगवान नारायण के इस मंदिर की जमीन पर नहीं पड़ती कभी परछाईं, दक्षिण भारत का अनोखा अष्टांग वि
भगवान नारायण के इस मंदिर की जमीन पर नहीं पड़ती परछाईं, अष्टांग विमान मंदिर
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Purushottam Maas Special: दक्षिण भारत में स्थित भगवान नारायण का यह अनोखा अष्टांग विमान मंदिर अपनी रहस्यमयी विशेषता के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि इस मंदिर की जमीन पर कभी परछाईं नहीं पड़ती, जो आस्था और जिज्ञासा दोनों को एक साथ जागृत करती है. स्थापत्य कला, धार्मिक महत्व और अद्भुत प्राकृतिक रहस्यों का संगम यह मंदिर भक्तों और पर्यटकों, दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है…
Ashtanga Vimana Temple: भगवान विष्णु को अति प्रिय पुरुषोत्तम मास चल रहा है, जो नारायण की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पुरुषोत्तम या अधिक मास में किए गए दर्शन-पूजन का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. आज आपको नारायण के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने आप में खास और अद्भुत है. दक्षिण भारत के इस अनोखे नारायण मंदिर का नाम कूडल अझगर है, जो मदुरै शहर में स्थित है. यह मंदिर सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है. करीब छह सौ साल से भी अधिक पुराना यह विष्णु मंदिर 108 दिव्य देशमों में शामिल है, जहां भगवान नारायण कूडल अझगर अर्थात सुंदर सर्प शय्या पर विराजमान रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं.
सबसे बड़ी खासियत अष्टांग विमान
मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका अष्टांग विमान (आठ हिस्सों वाला शिखर) है. दोपहर के समय भी इस शिखर की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती. यह वास्तुशिल्प का एक अद्भुत चमत्कार है, जो हजारों पर्यटकों और भक्तों को हैरान कर देता है. कूडल अझगर मंदिर पांड्य राजाओं के काल का है. बाद में विजयनगर साम्राज्य और मदुरै नायक शासकों ने इसमें भव्यता बढ़ाई. मंदिर ग्रेनाइट की ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है. प्रवेश द्वार पर पांच मंजिला राजगोपुरम है, जिसमें दशावतार, लक्ष्मी-नारायण, लक्ष्मी-नरसिंह और अन्य देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी बनी है. मंदिर परिसर में नवग्रहों का मंडप भी है.
मंदिर में कई छोटे मंदिर भी मौजूद
मुख्य मंदिर में भगवान कूडल अझगर के साथ उनकी पत्नी देवी मधुरवल्ली (लक्ष्मी) का अलग मंदिर है. परिसर में श्रीराम, श्रीकृष्ण और अन्य देवताओं के छोटे मंदिर भी बने हैं. दीवारों पर प्राचीन तमिल साहित्य जैसे सिलप्पादिकारम, परिपादल और मदुरै कांची के शिलालेख उत्कीर्ण हैं, जो मंदिर की प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं.
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं
इस मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. एक कथा के अनुसार, राक्षस सोमका ने ब्रह्माजी से चारों वेद चुरा लिए थे. तब भगवान विष्णु ने कूडल अझगर रूप में अवतार लिया और राक्षस का वध कर वेदों को वापस लौटाया. ब्रह्मांड पुराण में भी इस घटना का उल्लेख है. बारह अलवार संतों में से एक पेरियालवार (विष्णुचित्त) ने पांड्य राजा के दरबार में भगवान की महिमा गाई थी. उनके भक्ति गान से प्रभावित होकर स्वयं भगवान कूडल अझगर प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया.
ऐसे पहुंचे यह विष्णु मंदिर
मंगुडी मरुदन द्वारा रचित मदुरै कांची, कलिथ्थोकाई, परिपाटल और सिलप्पदिकारम जैसी साहित्यिक कृतियों में भी मंदिर का उल्लेख मिलता है. यह स्थान वैष्णव संप्रदाय के लिए खास महत्व रखता है. मदुरै की गर्म जलवायु को देखते हुए यहां घूमने का सबसे अच्छा समय दिसंबर से फरवरी तक है, जब मौसम सुहावना रहता है. मदुरै शहर में स्थित यह मंदिर पहुंचने में बहुत आसान है. मदुरै बस स्टैंड और रेलवे जंक्शन से मंदिर की दूरी मात्र 1 किलोमीटर है. मदुरै एयरपोर्ट से मंदिर करीब 14 किलोमीटर दूर है. यहां ऑटो, टैक्सी या लोकल बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


