अयप्पा मंदिर में गूंजा स्वामीये शरणम अयप्पा, अमित शाह ने नए भवन का किया उद्घाटन, जानिए मंद

अयप्पा मंदिर में गूंजा स्वामीये शरणम अयप्पा, अमित शाह ने नए भवन का किया उद्घाटन, जानिए मंद

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अयप्पा मंदिर में स्वामीये शरणम अयप्पा, अमित शाह ने नए भवन का किया उद्घाटन

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयप्पा मंदिर परिसर में बने नए सबरीसम भवन का उद्घाटन किया, जिससे इस पवित्र स्थल की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता एक बार फिर चर्चा में है. इस कार्यक्रम ने न सिर्फ श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा, बल्कि मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक खासियतों को भी सुर्खियों में ला दिया. आइए जानें, अयप्पा मंदिर और इसके नए सबरीसम भवन से जुड़ी अहम बातें…

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गृह मंत्री अमित शाह नई दिल्ली के आरके पुरम स्थित अयप्पा मंदिर परिसर में नवनिर्मित ‘सबरीसम’ भवन का उद्घाटन करने पहुंचे. मंदिर के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने तथा उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से इस नई सुविधा का निर्माण किया गया है. मंदिर अधिकारियों का कहना है कि सबरीसम भवन वर्षभर आयोजित होने वाले आध्यात्मिक समारोहों, सामुदायिक कार्यक्रमों, धर्मार्थ पहलों और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करेगा. बता दें कि मंदिर की दीवारों के चारों ओर हर दिन सैकड़ों की संख्या में दीपक जलाए जाते हैं. इस मंदिर की वास्तुकला मयूर विहार गुरुवायुरप्पन मंदिर के समान है, लेकिन यह मंदिर स्वामी अयप्पा को समर्पित है. आइए जानते हैं अयप्पा मंदिर के बारे में खास बातें…

ऐसे दर्शन देते हैं अयप्पा भगवान
आरके पुरम स्थित अयप्पा मंदिर में अयप्पा स्वामी एक राजा की तरह बैठे हुए भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, जो देखने में ही काफी मनमोहक लगता है. अय्यप्पा मंदिर आप भगवान अयप्पा के अलावा गणेश और सर्पदेव की मूर्तियों की भी पूजा कर सकते हैं. मंदिर का अपना बगीचा है जिसमें बहुत सारे तुलसी के पौधे हैं. सर्दियों के दौरान, मंदिर सभी को मुफ्त में काली चाय देकर सेवा करता है.

मंदिर के अंदर 41 दिनों तक अन्न दानम
लोगों की सेवा के रूप में, मंदिरों में हर घंटे घंटी बजाई जाती है और रविवार दोपहर को गरीब लोगों को भोजन दिया जाता है. हर दिन भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और यह मंदिर सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर खुल जाता है और रात 8 बजकर 30 मिनट पर बंद हो जाता है. अयप्पा मंदिर में ज्यादातर सभी त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन मगरा विलाक्कू के समय, मंदिर के अंदर 41 दिनों तक अन्न दानम या भंडारा होता है. वे 41 दिनों तक हर दिन 4 हजार से अधिक भक्तों को भोजन कराया जाता है.

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