सूर्य-चंद्रमा का शनि के घर में होना घातक, क्या इससे आपको भी हो सकता है काला मोतियाबिंद?
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Astro tips : ग्रहों की स्थिति सिर्फ भाग्य पर ही नहीं, हमारी आंखों पर भी असर डालती है. राहु को धुएं का कारक माना जाता है. अगर चंद्रमा राहु से पीड़ित हो जाता है तो काला मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है. देहरादून ज्योतिषाचार्य संजय लोकल 18 से बताते हैं कि काला मोतियाबिंद के बारे में जन्म पत्री पहले से बता देती है. हम पहले ही रोकथाम कर सकते हैं. इस समय कुंभ राशि पर राहु और शनि का प्रकोप है, इसलिए कुंभ राशि के जातक आंखों की समस्या से जूझ सकते हैं. शनि काला होता है, जहां भी बैठेगा जिस घर को भी देखेगा, उसको काला जरूर करेगा.
देहरादून. आंखों में कोई भी समस्या आना चिकित्सकीय कारण लगता है, लेकिन ग्रहों की स्थिति भी आंखों पर प्रभाव डालती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दाईं आंख का कारक सूर्य और बाईं आँख का कारक चंद्रमा होता है. जब सूर्य और चंद्रमा इकट्ठे होकर शनि के घर में बैठते हैं तो यह मोतियाबिंद का शिकार बना सकते हैं. राहु को धुएं का कारक माना जाता है जो सूर्य को ग्रहण लगता है. अगर चंद्रमा राहु से पीड़ित हो जाता है तो काला मोतियाबिंद होने की संभावना बढ़ जाती है. शनि की महादशा अन्तर्दशा चलने के दौरान आंखों के रोग हो सकते हैं, जो साइलेंट किलर के तौर पर बाद में नजर आते हैं. आपको इसके प्रभाव को कम करने के लिए भूमि तत्व के करीब रहना चाहिए. दिव्यांगों को भोजन कराना चाहिए. तांबे के बर्तन से सूर्य को जल चढ़ाने से भी लाभ मिलता है. सूर्य ग्रहण के दिन तवा, चिमटा और अंगीठी का दान करें. धूल, मिट्टी आदि से बचाएं.
जब सूर्य हो जाए पीड़ित
देहरादून के ज्योतिषाचार्य संजय बताते हैं कि शनि या राहु का गोचर सूर्य पर आ जाए तो काला मोतियाबिंद होने की संभावना प्रबल हो जाती है. धीरे-धीरे इसका प्रभाव बढ़ने लगता है. जन्म पत्री में इसके बारे में पहले से ही विदित है. इसके लिए हम पहले ही रोकथाम कर सकते हैं. सूर्य शनि और राहु की स्थितियां इंसान की आंखों पर असर डालती हैं. जब भी सूर्य राहु और शनि से पीड़ित हो जाता है तब ऐसा होता है. इस समय कुंभ राशि पर राहु और शनि का प्रकोप है, इसलिए कुंभ राशि वाले जातक इस समय आंखों की परेशानियों से जूझ सकते हैं.
भगवद्गीता में छिपा उपाय
ज्योतिषाचार्य संजय कहते हैं कि शनि काला होता है, जहां भी बैठेगा जिस घर को भी देखेगा, उसको काला जरूर करेगा. इसकी रोकथाम के लिए सबसे पहले आपको भूमि तत्व से जुड़ा होना चाहिए. जो छाया है, वह शनि की माता होती है, इसीलिए भूमि के टच में रहने से आप छाया के प्रभाव में रहेंगे. आप पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. समय-समय पर दृष्टि बाधित और मानसिक रूप से दुर्बल लोगों को भोजन कराएं. शराब के सेवन से दूर रहें. आचरण अच्छा रखें क्योंकि शनि कर्म का प्रतीक भी है. भगवद्गीता का पंचम अध्याय पढ़ लीजिए. इसके सभी पहलुओं को अपने जीवन में उतार लीजिए तभी आंखों के विकारों से सुरक्षा हो पाएगी.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


