हर समय बना रहता है कन्फ्यूजन और डर? कुंडली में राहु-चंद्र की युति देता है मानसिक तनाव!

हर समय बना रहता है कन्फ्यूजन और डर? कुंडली में राहु-चंद्र की युति देता है मानसिक तनाव!

Moon Rahu Yuti: आजकल छोटी-छोटी बातों पर तनाव, बेचैनी और मन का अस्थिर होना आम बात बन चुका है. कई लोग बिना किसी बड़ी वजह के अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं, रात में नींद नहीं आती, मन हर समय उलझा रहता है. ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध सिर्फ परिस्थितियों से नहीं बल्कि ग्रहों की चाल और कुंडली में उनकी स्थिति से भी जोड़ा जाता है. खासकर चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो जाए या राहु, शनि जैसे ग्रहों के साथ अशुभ स्थिति में आ जाए तो व्यक्ति मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगता है.

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि कई बार डिप्रेशन, डर, भ्रम और नकारात्मक सोच के पीछे ग्रहों का गहरा असर छिपा होता है. ऐसे में चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की युति को समझना बेहद जरूरी माना जाता है.

मन और भावनाओं का स्वामी है चंद्रमा
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का ग्रह माना जाता है. जिस तरह सूर्य के बिना जीवन अधूरा माना जाता है, उसी तरह चंद्रमा के बिना मानसिक शांति की कल्पना भी मुश्किल मानी जाती है, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा मजबूत हो तो वह इंसान मुश्किल हालात में भी खुद को संभाल लेता है. वहीं कमजोर चंद्रमा व्यक्ति को भावुक, अस्थिर और तनावग्रस्त बना सकता है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक कई लोगों का स्वभाव अचानक बदलने लगता है. कभी बहुत खुश तो कभी बेहद उदास रहना भी कमजोर चंद्रमा का संकेत माना जाता है.

चंद्रमा और राहु की युति क्यों मानी जाती है खतरनाक?
1. हर समय बना रहता है कन्फ्यूजन
अगर कुंडली में चंद्रमा और राहु एक ही राशि में हों तो इसे ज्योतिष में बेहद संवेदनशील स्थिति माना जाता है. खासकर तब जब दोनों ग्रहों के बीच डिग्री का अंतर सही तरीके से बन रहा हो. ऐसे लोग अक्सर किसी भी फैसले को लेकर दुविधा में फंसे रहते हैं. मन हर समय उलझा रहता है और छोटी बात भी उन्हें अंदर तक परेशान कर देती है. ऐसे लोगों में भौतिक सुख पाने की चाह ज्यादा देखी जाती है, लेकिन संतोष की कमी बनी रहती है. बाहर से सब कुछ ठीक दिखने के बावजूद मन बेचैन रहता है.

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2. खाली बैठना बढ़ा सकता है तनाव
ज्योतिष विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों की कुंडली में राहु और चंद्रमा की युति होती है, उन्हें हमेशा खुद को व्यस्त रखना चाहिए, अगर ऐसे लोग लंबे समय तक खाली बैठे रहें तो नकारात्मक सोच तेजी से बढ़ने लगती है. कई बार यही स्थिति एंजायटी और डिप्रेशन का कारण भी बन सकती है. शनि और चंद्रमा साथ हों तो बढ़ सकती है उदासी

3. सपनों और नींद पर भी पड़ता है असर
कुंडली में शनि और चंद्रमा की युति को भी मानसिक तनाव का बड़ा कारण माना जाता है. ऐसे लोग अक्सर अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं. कई बार सब कुछ होने के बावजूद उन्हें खुशी महसूस नहीं होती. रात में डरावने सपने आना, पुरानी बातें याद आना या बेचैनी में नींद टूटना भी इस योग का असर माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अगर शनि और चंद्रमा बहुत करीब हों तो व्यक्ति का मन भारी रहने लगता है. वह छोटी-छोटी बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है.

अष्टम भाव में बने तो बढ़ सकती हैं परेशानियां
अगर कुंडली के अष्टम भाव में शनि और चंद्रमा साथ बैठे हों तो व्यक्ति की इच्छा शक्ति कमजोर हो सकती है. ऐसे लोग कई बार अपने लक्ष्य को लेकर उत्साह खो देते हैं. जीवन में सफलता देर से मिलने की वजह से भी तनाव बढ़ सकता है.

चंद्र-बुध की युति भी कर सकती है परेशान
ज्योतिष में चंद्रमा और बुध को मानसिक स्थिति से जुड़ा ग्रह माना गया है, अगर इन दोनों पर राहु, केतु या शनि की दृष्टि पड़ जाए तो व्यक्ति बेहद संवेदनशील हो सकता है. छोटी-सी बात भी उसे गहराई तक प्रभावित कर देती है. ऐसे लोग कई बार दूसरों की बातों को दिल पर ले लेते हैं और धीरे-धीरे अकेलेपन की तरफ बढ़ने लगते हैं. यही वजह है कि ज्योतिषाचार्य मानसिक तनाव महसूस होने पर कुंडली का विश्लेषण करवाने की सलाह देते हैं.

भगवान शिव की पूजा क्यों मानी जाती है असरदार?
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा का संबंध भगवान शिव से माना गया है. यही कारण है कि मानसिक तनाव या चंद्र दोष होने पर शिव उपासना को बेहद लाभकारी बताया जाता है. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का नियमित जाप मन को शांत करने में मददगार माना जाता है.

मान्यता है कि रोज करीब 24 मिनट तक श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने से धीरे-धीरे मन की बेचैनी कम होने लगती है. कई लोग सोमवार का व्रत, शिवलिंग पर जल चढ़ाना और ध्यान लगाने को भी फायदेमंद मानते हैं.

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का आईना कहा गया है, अगर कुंडली में राहु, शनि या दूसरे अशुभ ग्रह चंद्रमा को प्रभावित करें तो व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर सकता है. हालांकि सही मार्गदर्शन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उपायों से हालात को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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