शकुनि-कंस ही नहीं, इतिहास के इन 5 मामाओं ने भी काटा था गदर, लिस्ट में श्रीकृष्ण का नाम देख
शकुनि-कंस ही नहीं, इन 5 मामाओं ने भी खूब काटा गदर, लिस्ट में श्रीकृष्ण का नाम
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Mahabharat Mama: महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं बल्कि रिश्तों, राजनीति और सत्ता संघर्ष का ऐसा इतिहास है, जिसमें कई पात्र अपने ही संबंधों के कारण विनाश का कारण बने. खास बात यह है कि इस महागाथा में मामा का किरदार कई बार निर्णायक और घातक साबित हुआ. कोई छल का प्रतीक बना, कोई अहंकार का तो कोई नीति और धर्म का. आइए जानते हैं उन प्रमुख मामाओं की कहानी, जो अपने भांजों के लिए काल बन गए.
Mahabharat Mama: महाभारत के चालबाज़ शकुनि और मथुरा के अत्याचारी कंस का नाम आते ही सबसे खौफनाक मामाओं की तस्वीर उभर आती है, लेकिन पौराणिक कथाओं में ऐसे सिर्फ 2 ही नहीं, बल्कि 5 और मामाओं का जिक्र मिलता है, जिन्होंने अपने अत्याचार, षड्यंत्र और आतंक से इतिहास और लोककथाओं में गहरी छाप छोड़ी. हैरानी की बात यह है कि इन 5 कुख्यात मामाओं की चर्चित सूची में भगवान श्रीकृष्ण का नाम भी शामिल किया जाता है. यह जानना दिलचस्प है कि आखिर इन्हें क्यों और किस आधार पर आतंकी मामा कहा गया…

सबसे पहले बात करते हैं शकुनि की. गांधार नरेश शकुनि, कौरवों के मामा थे. माना जाता है कि हस्तिनापुर से बदला लेने की आग में उन्होंने दुर्योधन के मन में पांडवों के प्रति ईर्ष्या और घृणा का जहर भरा. जुए का कुख्यात खेल हो या द्रौपदी चीरहरण की योजना, हर जगह शकुनि की कुटिल बुद्धि दिखाई देती है. दुर्योधन को सत्ता दिलाने की चाह में शकुनि ने ऐसा षड्यंत्र रचा, जिसने पूरे कुरुवंश का विनाश कर दिया. अंततः महाभारत युद्ध में कौरवों का सर्वनाश हुआ और दुर्योधन समेत उसके सभी भाई मारे गए. इस तरह शकुनि अपने ही भांजों के विनाश का कारण बने.

अब बात करते हैं कंस की. मथुरा का अत्याचारी राजा कंस, भगवान कृष्ण का मामा था. आकाशवाणी हुई थी कि उसकी बहन देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा. भय और सत्ता के मद में चूर कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनके छह बच्चों की हत्या कर दी. लेकिन नियति को कौन टाल सकता था. आठवें पुत्र के रूप में जन्मे कृष्ण ने बड़े होकर कंस का अंत कर दिया. कंस ने अपने भांजे को मारने की कोशिश की, लेकिन वही भांजा उसके लिए काल बन गया.
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महाभारत में एक और महत्वपूर्ण मामा थे शल्य. शल्य, नकुल और सहदेव के मामा थे. वे मूल रूप से पांडवों का साथ देना चाहते थे, लेकिन दुर्योधन ने छल से उनका आतिथ्य कर उन्हें अपने पक्ष में कर लिया. युद्ध में शल्य को कर्ण का सारथी बनाया गया. कहा जाता है कि उन्होंने युद्ध के दौरान कर्ण का मनोबल तोड़ने का काम किया. लगातार कटाक्ष और निराशाजनक बातें कहकर उन्होंने कर्ण को मानसिक रूप से कमजोर किया. परिणामस्वरूप कर्ण अर्जुन के हाथों मारा गया. शल्य की भूमिका ने कौरव पक्ष की हार को और तेज कर दिया.

इसी कड़ी में हमारे प्रभु श्रीकृष्ण का नाम भी आता है. कृष्ण, अभिमन्यु और पांडवों के रिश्ते में मामा माने जाते हैं उन्होंने धर्म की स्थापना के लिए कई कठोर निर्णय लिए. भगवान श्रीकृष्ण युद्ध के बारे में पहले से ही सबकुछ जानते थे, उसके बाद भी उन्होंने अभिमन्यु को चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए भेज दिया, जहां कौरव चारों तरह से उसका इंतजार कर रहे थे. जयद्रथ समेत 7 योद्धाओं ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी. यह हत्य युद्ध नियमों के खिलाफ थी. युद्ध में नीति और चतुराई का सहारा लेते हुए उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महायोद्धाओं के अंत का मार्ग प्रशस्त किया. कृष्ण ने धर्म की रक्षा के लिए अपने ही संबंधों से ऊपर उठकर निर्णय लिए.

सबसे अंत में नाम आता है कृपाचार्य का. कृपाचार्य अश्वत्थामा के मामाश्री थे. महाभारत युद्ध में मामा और भांजे ने मिलकर कोहराम मचा रखा था. अश्वत्थामा ने ही द्रौपदी के सोते हुए पांचों पुत्रों का वध कर दिया था. गांधारी ने कृपाचार्य से कहा भी था कि अश्वत्थामा ने जो किया, वह पाप है और आप भी उस पाप में शामिल हैं. कृपाचार्य कौरव और पांडव दोनों के गुरु थे और रिश्तों के स्तर पर परिवार के बुजुर्ग संरक्षक माने जाते थे. युद्ध में उन्होंने कौरव पक्ष का साथ दिया.


