Shani Jayanti 2026 Katha: शनि जयंती पर पढ़ें यह पौराणिक कथा, खुश हो जाएंगे शनिदेव
शनि जयंती पर पढ़ें यह कथा, खुश होंगे शनिदेव, संकटों को पलभर में करेंगे दूर!
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Shani Jayanti Vrat Katha: शनि जयंती पर पूजा के समय शनिदेव के जन्म की कथा सुनते हैं. शनिदेव की जन्म कैसे हुआ और वे न्याय के देवता कैसे बने? इसका वर्णन इस कथा में मिलता है. आज शनि जयंती मनाई जा रही है, इस पर पढ़ें शनिदेव की जन्म कथा.
शनि जयंती 2026 व्रत कथा. (Photo: AI)
Shani Jayanti 2026 Katha In Hindi: शनि जयंती के अवसर पर जब शनिदेव की पूजा करते हैं, तो उस समय शनि जयंती की कथा सुनते या पढ़ते हैं. शनिदेव न्याय के देवता हैं, वे किसी के प्रति अन्याय नहीं करते हैं और अधर्म करने वालों को छोड़ते नहीं हैं. उन्होंने गलत करने पर अपने पिता सूर्य देव को भी नहीं छोड़ा था. हर व्यक्ति के जीवन में शनिदेव कम से कम दो बार जरूर आते हैं, एक साढ़ेसाती और दूसरा ढैय्या में. तब वे उनके कर्मों का फल देते हैं. आज शनि जयंती है. आइए जानते हैं शनि जयंती की कथा.
शनि जयंती 2026 कथा
स्कंदपुराण में शनिदेव के जन्म की कथा मिलती है. शनिदेव के पिता का नाम सूर्य देव और माता का नाम छाया है. ग्रहों के राजा सूर्य का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ. सूर्य देव अत्यंत तेजवान थे, संज्ञा उनकी तेज को सहन नहीं कर पाती थीं. वे अपने पति सूर्य देव के तेज से परेशान थीं. इस दौरान उन्होंने वैवस्वत मनु, यमुना और यमराज के रुप में सूर्य देव की तीन संतानों को जन्म दिया.
समय व्यतीत होने के बाद भी सूर्य देव के तेज में कोई कमी नहीं थी. एक दिन संज्ञा ने अपने तपोबल से अपनी ही हमशक्ल स्त्री को प्रकट किया, जिसका नाम संवर्णा रखा. ये छाया के नाम से प्रसिद्ध हैं. उन्होंने छाया को सूर्य लोक में अपनी जगह रहने की आज्ञा दी और कहा कि इस बात का पता किसी को नहीं होना चाहिए.
इसके बाद संज्ञा सूर्य लोक से निकलकर अपने पिता दक्ष के घर चली गईं. लेकिन इससे उनके पिता खुश नहीं हुए और उनको वापस सूर्य लोक जाने को कहा. लेकिन संज्ञा सूर्य लोक नहीं गईं और वह घोड़ी का रूप धारण करके वन में तप करने लगीं.
दूसरी ओर सूर्य लोक में छाया सूर्य देव के साथ रहने लगीं. छाया और सूर्य देव से भी तीन संतानें शनिदेव, मनु और भद्रा हुईं. शनिदेव जब अपनी माता छाया के गर्भ में थे, तब उन्होंने महादेव की कठोर तपस्या की थी, इससे शनिदेव का रंग काला हो गया.
शनिदेव की जन्म कथा. (Photo: AI)
शनिदेव जब पैदा हुए तो सूर्य देव उनके रंग को देखकर क्रोधित हो गए. उनके मन में यह प्रश्न था कि उनका पुत्र काला नहीं हो सकता है. वे छाया के चरित्र पर संदेह करने लगे. शनिदेव को जब अपनी मां के अपमान की बात पता चली तो वे क्रोधित हो गए और तब से ही उनके मन में पिता के प्रति शत्रुता का भाव आ गया.
वहीं छाया ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग होने का श्राप दिया. पिता के व्यवहार से आहत शनिदेव ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की. महादेव ने प्रसन्न होकर शनिदेव को ग्रहों में श्रेष्ठ होने और न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने का आशीर्वाद दिया. तब से शनिदेव की पूजा न्याय के देवता के रूप में होती है. वे लोगों के साथ अन्याय नहीं होने देते हैं. जो उनकी पूजा करता है, उससे प्रसन्न होकर वे उसके कष्टों और संकटों को दूर करते हैं.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


