5 शुभ संयोग में वट सावित्री आज, कैसे करें व्रत-पूजा? जानें सही विधि, मुहूर्त, मंत्र, महत्व
Vat Savitri Vrat 2026 Puja Vidhi: वट सावित्री आज 5 शुभ संयोग में है. ब्रह्म मुहूर्त 04:07 ए एम से 04:48 ए एम में स्नान आदि से निवृत होकर सुहागन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य का व्रत रखा है. आज वट सावित्री व्रत पर सौभाग्य योग 10:26 ए एम तक है. सौभाग्य योग में पूजा करना आपके लिए उत्तम फलदायी होगा. यह योग सौभाग्य और दांपत्य सुख में वृद्धि करने वाला है. उसके बाद से शोभन योग बनेगा, जो पूर्ण रात्रि तक है. इन दो शुभ योगों के अलावा आज शनि जयंती, शनि अमावस्या और शनिवार व्रत का भी सुंदर संयोग बना है. इस व्रत में वट वृक्ष, देवी सावित्री और सत्यवान की पूजा करने का विधान है. इससे पति की आयु लंबी होती है और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र आदि के बारे में.
वट सावित्री व्रत 2026 मुहूर्त
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है.
ज्येष्ठ अमावस्या का प्रारंभ: 16 मई, शनिवार, सुबह 5:11 बजे से
ज्येष्ठ अमावस्या का समापन: 17 मई, रविवार, 1:30 एएम पर
सौभाग्य योग: प्रात:काल से सुबह 10:26 बजे तक
शोभन योग: सुबह 10:26 बजे से लेकर कल प्रात:काल तक
पूजा के लिए शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 07:12 बजे से सुबह 08:54 बजे, चर-सामान्य मुहूर्त: दोपहर 12:18 पी एम से 02:00 पी एम तक
राहुकाल: सुबह 08:54 बजे से लेकर सुबह 10:36 बजे तक
वट सावित्री व्रत 2026 पूजा सामग्री
बरगद का पेड़, बरगद का फल, बांस का एक पंखा, देवी सावित्री और सत्यवान की मूर्ति, कच्चा सूत, सवा मीटर कपड़ा, सुहाग सामग्री, सिंदूर, मौसमी फल, रोली, चंदन, फूल, माला, बताशा, पान, सुपारी, पानी से भरा एक कलश, मखाना, मिठाई, अक्षत्, गंध, इत्र, धूप, दीप, नारियल, गुड़, पूड़ी, मूंगफली, भींगा चना, वट सावित्री व्रत कथा और पूजा विधि की एक पुस्तक आदि.
वट सावित्री व्रत 2026 पूजा मंत्र
व्रत संकल्प मंत्र: मम वैधव्यादि सकलदोष परिहारार्थं ब्रह्मसावित्रीप्रीत्यर्थं सत्यवत्सावित्रीप्रीत्यर्थं च वटसावित्रीव्रतमहं करिष्ये.
सावित्री को अर्घ्य देने का मंत्र: अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते। पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्ध्यं नमोस्तु ते।।
वट वृक्ष प्रार्थना मंत्र: वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमै:। यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोअसि त्वं महीतले। तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च संपन्नं कुरु मां सदा।।
वट सावित्री व्रत और पूजा विधि
- वट सावित्री व्रत सभी महिलाओं को करना चाहिए. ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी को प्रात:काल में स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प करना चाहिए. इस व्रत का संकल्प करके तीन दिन का उपवास करना चाहिए.
- यदि सामर्थ्य नहीं है तो त्रयोदशी को रात में भोजन करें. अमावस्या के दिन अपवास करके प्रतिपद को समापन करें.
- अमावस्या के दिन वट वृक्ष के पास बैठकर बांस के किसी पात्र में सत्यवान और सावित्री की मूर्ति या तस्वीर रखें. उसके बाद अक्षत्, फूल, माला और अन्य पूजा सामग्री से उनकी पूजा करें.
- इसके बाद बरगद के पेड़ का पूजन करें. उसमें कच्चा सूत लपेटते हुए 7 बार परिक्रमा करें.
- फिर देवी सावित्री को जल से अर्घ्य दें और मंत्र पढ़ें. उसके बाद वट वृक्ष की प्रार्थना करें.
- कुछ स्थानों पर बांस के पंखे भी पूजा में रखते हैं. पूजा के समापन के बाद महिलाएं उसी पंखे से पति को हवा करती हैं.
- पूजा होने के बाद भींगा हुआ चना और बरगद के एक फल को बिना चबाए पानी से निगल लेते हैं. दिनभर फलाहार पर उपवास रखते हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत को पूरा करते हैं.
- हर क्षेत्र विशेष में कोई न कोई परंपरा जुड़ जाती है, यहां पर सभी परंपराओं को लिखना संभव नहीं है. आपके यहां जिस विधि से पूजा होती है, उसका पालन करें.


