Vat Savitri Fasting Rules: वट सावित्री के पवित्र व्रत में ये चीजें हैं पूरी तरह वर्जित, जा
वट सावित्री व्रत में ये चीजें पूरी तरह वर्जित, जानें- क्या खाएं और क्या नहीं?
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Vat Savitri Fasting Rules: 16 मई दिन शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत किया जाएगा. वट सावित्री व्रत में महिलाएं पूरे दिन श्रद्धा और नियमों के साथ उपवास रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन खान-पान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इस व्रत का संबंध पौराणिक कथा में वर्णित सावित्री और सत्यवान से है. आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत में क्या खाएं और क्या ना खाएं…
Vat Savitri Fasting Rules: भगवान विष्णु को समर्पित ज्येष्ठ मास में वट सावित्री व्रत महिलाओं के लिए खास माना जाता है. यह व्रत खास तौर पर पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूती देने के लिए मनाया जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं वटवृक्ष यानी बरगद के नीचे पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान की जिंदगी वापस मंगवाई थी और तभी से यह व्रत हर साल श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है. इस व्रत को लेकर खानपान के सेवन में कई तरह की दुविधा सामने आती है. मन में शंका बनी रहती है कि अगर ये चीज खा ली तो हमारा कहीं व्रत खंडित ना हो जाए.
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं का एक प्रमुख व्रत माना जाता है. यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है. ज्येष्ठ मास की अमावस्या या पूर्णिमा तिथि को यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में मनाया जाता है. इस व्रत का संबंध पौराणिक कथा में वर्णित सावित्री और सत्यवान से है. मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे. तभी से यह व्रत अटूट वैवाहिक जीवन और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.
वट सावित्री व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
- मांसाहार और अंडे
- लहसुन और प्याज
- शराब या किसी भी प्रकार का नशा
- तामसिक और अधिक मसालेदार भोजन
- बासी भोजन
- कुछ स्थानों पर नमक का सेवन भी वर्जित माना जाता है.
वट सावित्री व्रत में क्या खा सकते हैं?
- फल और सूखे मेवे
- दूध, दही और मखाना
- साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन
- पूजा के बाद सात्विक भोजन
वट सावित्री व्रत में खान-पान के नियम
व्रत के दौरान महिलाओं को फल, मेवे, खिचड़ी, दही, और शहद का सेवन करना चाहिए. इस दिन किसी भी तरह का अनाज ग्रहण ना करें. अंडा, मांस, मछली, प्याज, लहसुन जैसी चीजें पूरी तरह से वर्जित होती हैं, इसलिए इससे बचें. व्रत का उद्देश्य शरीर और मन को शुद्ध करना होता है, ताकि जो भी शुभ काम किया जाए, उसमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो. व्रत में घर पर बनी शुद्ध मिठाई, हलवा या पुआ का सेवन किया जा सकता है.
क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा?
वट सावित्री व्रत में वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है. बरगद का पेड़ दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक भी है, इसलिए महिलाएं इसकी परिक्रमा कर सूत बांधती हैं और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं.
व्रत से पहले इस चीज का रखें ध्यान
स्वास्थ्य के नजरिए से देखें तो किसी भी व्रत से एक दिन पहले सादा भोजन करने की सलाह दी जाती है. वो इसलिए क्योंकि तामसिक भोजन को भारी और ना पचने योग्य माना जाता है. इससे शरीर को नुकसान हो सकता है. तामसिक भोजन से व्रत की अवधि में शरीर को ऊर्जा नहीं मिलती और व्रत के नियमों का पालन करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है.
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
इस व्रत को करने की पूजा विधि बेहद खास होती है. व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इस व्रत में बरगद के पेड़ का विशेष महत्व होता है. पूजा करने से पहले बरगद के पेड़ यानी वट वृक्ष के नीचे सफाई करें और पूजा स्थल तैयार करें. सावित्री और सत्यवान की पूजा करें और वट वृक्ष को जल चढ़ाएं. लाल धागे से वट वृक्ष को बांधें और 7 बार परिक्रमा करें. व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें. गरीबों और ब्राह्मणों को दान दें और उनसे आशीर्वाद लें. व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


