पिछले जन्म में आप कौन थे? आपकी कुंडली बता सकती है पिछले जन्म की कहानी

पिछले जन्म में आप कौन थे? आपकी कुंडली बता सकती है पिछले जन्म की कहानी

Past Life Astrology: कभी आपने यूं ही सोचा है कि आपको कुछ चीज़ें बिना सीखे कैसे आती हैं? या कुछ लोगों से पहली मुलाकात में ही अजीब सा अपनापन क्यों महसूस होता है? ज्योतिष की दुनिया में इन सवालों के जवाब छुपे हो सकते हैं-और वो भी आपकी अपनी जन्म कुंडली में. खासकर कुंडली का पंचम भाव, जिसे अक्सर प्रेम, बुद्धि और संतान से जोड़ा जाता है, वही आपके पिछले जन्म के रहस्यों की भी झलक देता है. ज्योतिष मानता है कि हमारे पुराने जन्म के कर्म, रिश्ते और पहचान इस जन्म में भी किसी न किसी रूप में साथ चलते हैं. तो अगर आप जानना चाहते हैं कि आप पिछले जन्म में कौन थे-स्त्री, पुरुष, कोई विद्वान या साधारण व्यक्ति-तो इसकी शुरुआत पंचम भाव से होती है.

पंचम भाव: सिर्फ प्रेम नहीं, पिछले जन्म का आईना भी
जन्म कुंडली का पंचम भाव आमतौर पर शिक्षा, प्रेम संबंध और रचनात्मकता से जुड़ा माना जाता है, लेकिन ज्योतिष के जानकार इसे पिछले जन्म के कर्मों का दर्पण भी कहते हैं. इस भाव का स्वामी ग्रह और उसमें बैठे ग्रह यह संकेत देते हैं कि आप अपने पिछले जीवन में किस तरह के व्यक्ति थे, अगर पंचम भाव में चंद्रमा मजबूत है, तो माना जाता है कि जातक पिछले जन्म में भावुक और संवेदनशील व्यक्ति रहा होगा. वहीं मंगल की उपस्थिति यह दिखा सकती है कि आप योद्धा प्रवृत्ति के रहे होंगे या किसी संघर्षपूर्ण जीवन का हिस्सा रहे होंगे.

कैसे जानें-आप पिछले जन्म में क्या थे?
ग्रहों की स्थिति देती है संकेत
पंचम भाव में बैठे ग्रह या उसके स्वामी की स्थिति आपके पिछले जन्म की झलक दिखाती है. उदाहरण के तौर पर-
अगर शुक्र प्रभावी है, तो आप कला, सौंदर्य या प्रेम से जुड़े कामों में रहे होंगे.
अगर शनि का प्रभाव ज्यादा है, तो यह संकेत देता है कि आपने कठिन जीवन जिया होगा या किसी जिम्मेदारी से बंधे रहे होंगे.

राशि का रोल भी अहम
सिर्फ ग्रह ही नहीं, पंचम भाव की राशि भी बहुत कुछ बताती है. जैसे अगर यहां सिंह राशि है, तो आप पिछले जन्म में नेतृत्व करने वाले व्यक्ति रहे होंगे. वहीं मीन राशि होने पर आध्यात्मिक झुकाव या साधु जीवन के संकेत मिलते हैं.

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रियल लाइफ में कैसे दिखते हैं इसके असर?
कई बार लोग कहते हैं कि उन्हें बिना सीखे संगीत आता है, या किसी भाषा से अचानक जुड़ाव महसूस होता है. ज्योतिष इसे पिछले जन्म के अनुभवों से जोड़ता है.

मान लीजिए किसी व्यक्ति को बचपन से ही पूजा-पाठ में मन लगता है, जबकि उसके परिवार में ऐसा माहौल नहीं है. यह संकेत हो सकता है कि वह पिछले जन्म में धार्मिक या आध्यात्मिक जीवन जी चुका है.

इसी तरह कुछ लोगों को पानी से डर लगता है या ऊंचाई से-बिना किसी स्पष्ट कारण के. इसे भी पुराने जन्म के अनुभवों का असर माना जाता है.

क्या नाम और जगह का भी पता चलता है?
यह थोड़ा जटिल सवाल है. ज्योतिष सीधे तौर पर आपका पिछले जन्म का नाम या शहर नहीं बताता, लेकिन संकेत जरूर देता है. पंचम भाव के साथ नवम भाव और बारहवें भाव का विश्लेषण करने पर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आप किस तरह के माहौल में रहते थे-राजसी, साधारण या आध्यात्मिक.

कुछ अनुभवी ज्योतिषी इन भावों को मिलाकर आपके पिछले जीवन की कहानी को जोड़ने की कोशिश करते हैं, हालांकि इसे पूरी तरह सटीक मानना हमेशा सही नहीं होता.

क्यों जरूरी है पिछले जन्म को जानना?
अब सवाल आता है-अगर पता भी चल जाए तो फायदा क्या? दरअसल, ज्योतिष के अनुसार, पिछले जन्म के कर्म ही इस जन्म की परिस्थितियों को प्रभावित करते हैं, अगर आप अपने पुराने कर्मों को समझ लेते हैं, तो इस जीवन में बेहतर फैसले ले सकते हैं.

उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी कुंडली में दिखता है कि आपने पिछले जन्म में रिश्तों को महत्व नहीं दिया, तो इस जन्म में बार-बार रिश्तों में समस्याएं आ सकती हैं. ऐसे में जागरूक होकर आप इन गलतियों को सुधार सकते हैं.

पंचम भाव सिर्फ आपके वर्तमान जीवन की खुशियों का संकेत नहीं देता, बल्कि यह आपके पिछले जन्म की कहानी भी बयां करता है. हालांकि यह पूरी तरह सटीक विज्ञान नहीं है, लेकिन इसके संकेत कई बार चौंका देते हैं, अगर आप अपनी कुंडली को सही तरीके से समझें, तो शायद आपको अपने ही जीवन के कुछ अनसुलझे सवालों के जवाब मिल जाएं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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