त्वचा रोग से हैं परेशान? मंगलुरु के इस मंदिर में कराएं रक्त कंबला पूजा, होगा फायदा!

त्वचा रोग से हैं परेशान? मंगलुरु के इस मंदिर में कराएं रक्त कंबला पूजा, होगा फायदा!

Sri Suryanarayana Temple: मंगलुरु के मारोली इलाके में स्थित श्री सूर्यनारायण मंदिर इन दिनों फिर चर्चा में है. वजह सिर्फ इसकी प्राचीनता नहीं, बल्कि यहां होने वाली “रक्त कंबला पूजा” है, जिसे लेकर लोगों के बीच गहरी आस्था देखने को मिल रही है. कहा जाता है कि इस विशेष पूजा में शामिल होने वाले श्रद्धालु त्वचा संबंधी परेशानियों से राहत और बेहतर स्वास्थ्य की कामना लेकर आते हैं. सोशल मीडिया पर मंदिर से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद अब कर्नाटक ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं.

करीब 1200 साल पुराने इस मंदिर की परंपराएं आज भी उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती हैं, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास और मानसिक संतुलन का भी माध्यम है. यही वजह है कि मंदिर में हर दिन भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है.

क्या है रक्त कंबला पूजा?
अर्थ: ‘रक्त’ का अर्थ लाल या रक्त से संबंधित है और ‘कंबला’ का अर्थ है कंबल या लाल कपड़ा.
उद्देश्य: यह पूजा मुख्य रूप से त्वचा रोगों (Skin diseases), चर्म रोगों के निवारण के लिए की जाती है.
मान्यता: ऐसा माना जाता है कि सूर्यनारायण स्वामी को लाल वस्त्र या विशेष सेवा अर्पित करने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और सूर्य देव आरोग्य प्रदान करते हैं.
ऐतिहासिक संदर्भ: यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है और इसे 450 साल पहले एक जैन रानी ने सात गांवों (मारोली, पदवु, अलापे, बाजल, कन्नूर, जेप्पू और कंकनाडी) के निवासियों की दुखों को दूर करने के लिए पुनर्निर्मित किया था.

450 साल पहले हुआ था पुनर्निर्माण
सात गांवों से जुड़ी है मंदिर की कहानी
स्थानीय इतिहास के अनुसार इस मंदिर का पुनर्निर्माण करीब 450 साल पहले एक जैन रानी ने करवाया था. माना जाता है कि उस समय आसपास के सात गांव मारोली, पदवु, अलापे, बाजल, कन्नूर, जेप्पू और कंकनाडी कई तरह की परेशानियों से गुजर रहे थे. लोगों की कठिनाइयों को दूर करने और क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के उद्देश्य से मंदिर को दोबारा विकसित किया गया.

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मंदिर से जुड़ी एक और रोचक मान्यता यह भी है कि यहां कभी ऋषियों ने “प्रकाश के गोले” का अनुभव किया था. इसके बाद इस स्थान को दिव्य मानते हुए पूजा शुरू हुई. यही कथाएं आज भी मंदिर की पहचान का हिस्सा हैं.

रक्त कंबला पूजा कैसे होती है?
मरौली श्री सूर्यनारायण मंदिर में यह एक विशेष प्रकार की सेवा है:
संकल्प और तैयारी: श्रद्धालु मंदिर के पुजारियों के माध्यम से रक्त कंबला पूजा का संकल्प लेते हैं.
पूजा सामग्री: पूजा में मुख्य रूप से लाल रंग के कपड़े (कंबल), लाल फूल, और सूर्य देव को प्रिय सामग्री का उपयोग किया जाता है.
अर्पण: यह सेवा भगवान सूर्यनारायण की मूर्ति को अर्पित की जाती है.
विशेष सेवा: यह आमतौर पर त्वचा की समस्याओं वाले लोगों द्वारा की जाने वाली एक विशेष सेवा के रूप में आयोजित की जाती है.

मंदिर में हर दिन लगता है भक्तों का तांता
सुबह और शाम की आरती के समय मंदिर का माहौल अलग ही दिखाई देता है. स्थानीय परिवारों से लेकर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर प्रशासन की ओर से प्रतिदिन अन्नप्रसादम की व्यवस्था भी की जाती है, जिसमें दोपहर और रात का भोजन शामिल रहता है.

दिलचस्प बात यह है कि इस पूजा को लेकर लोगों के अनुभव भी चर्चा में रहते हैं. कई श्रद्धालु बताते हैं कि लंबे समय तक इलाज कराने के बाद भी जब राहत नहीं मिली, तब उन्होंने यहां पूजा करवाई. हालांकि चिकित्सा विज्ञान इन दावों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन आस्था का यह पक्ष लोगों को मंदिर तक खींच लाता है.

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