नौतपा: क्यों बढ़ती है भीषण गर्मी और सूना पड़ता है शहर?

नौतपा: क्यों बढ़ती है भीषण गर्मी और सूना पड़ता है शहर?

Nautapa 2026: गर्मी का नाम सुनते ही पसीना छूटने लगता है, लेकिन जब बात नौतपा की हो, तो हालात कुछ अलग ही हो जाते हैं. हर साल मई-जून के बीच आने वाला यह दौर सिर्फ तापमान नहीं बढ़ाता, बल्कि लोगों की दिनचर्या तक बदल देता है. कई लोग इसे सिर्फ मौसम की मार मानते हैं, तो कुछ इसे ज्योतिष से जोड़कर देखते हैं. इस बार भी लोगों के मन में यही सवाल है कि नौतपा कब शुरू होगा और इसका असर कितना पड़ेगा. दिलचस्प बात यह है कि नौतपा को लेकर पुराने समय से ही कई मान्यताएं चली आ रही हैं, जिनका असर आज भी लोगों की सोच और जीवनशैली में दिखता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

कब से कब तक रहेगा नौतपा?
-ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, साल 2026 में नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी और यह 2 जून तक चलेगा. ये पूरे नौ दिन ऐसे होते हैं, जब सूरज अपनी पूरी ताकत के साथ धरती को तपाता है. इस दौरान तापमान तेजी से बढ़ता है और दोपहर के समय बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं लगता.

-अगर आपने ध्यान दिया हो, तो इस समय सड़कों पर सन्नाटा सा छा जाता है. लोग जरूरी काम भी सुबह या शाम के समय ही निपटाना पसंद करते हैं. खास बात यह है कि इन नौ दिनों के दौरान अगर बारिश हो जाती है, तो इसे नौतपा का टूटना माना जाता है और इसका असर आने वाले मानसून पर भी पड़ सकता है.

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क्या है नौतपा का ज्योतिषीय महत्व?
-सूर्य और रोहिणी नक्षत्र का संबंध ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, नौतपा का सीधा संबंध सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से होता है. इस दौरान सूर्य लगभग 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं. रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा होता है, जो शीतलता का प्रतीक माना जाता है.

-लेकिन जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो वे उसकी शीतलता को खत्म कर देते हैं. यही वजह है कि इन दिनों गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है. कई ज्योतिषी मानते हैं कि अगर नौतपा के दिन पूरी तरह तपते हैं, तो मानसून अच्छा रहता है.

मौसम और मानसून का संकेत
गांवों में आज भी बुजुर्ग नौतपा के आधार पर मानसून का अनुमान लगाते हैं. अगर इन दिनों तेज गर्मी पड़ती है, तो इसे अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है. वहीं अगर बीच में बादल छा जाएं या बारिश हो जाए, तो लोग इसे कमजोर मानसून का संकेत समझते हैं.

नौतपा के दौरान क्या करें?
– दिनचर्या में छोटे बदलाव नौतपा के दौरान सबसे जरूरी है अपनी दिनचर्या को थोड़ा बदलना. सुबह जल्दी उठना, हल्का और ठंडा भोजन करना, और ज्यादा से ज्यादा पानी पीना-ये छोटे-छोटे कदम आपको इस भीषण गर्मी से बचा सकते हैं.

धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, नौतपा में सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं. जैसे रोज सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना. इसके अलावा ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है.

दान और सेवा का महत्व
इस दौरान जरूरतमंदों को पानी, गुड़, घी, गेहूं और लाल कपड़े का दान करना पुण्यदायी माना जाता है. खासकर पक्षियों के लिए पानी रखना एक छोटी सी आदत है, लेकिन इसका बड़ा असर होता है. कई लोग अपने घर की छत या बालकनी में पानी के बर्तन रखते हैं, जिससे पक्षियों को राहत मिलती है.

आम जीवन पर असर
नौतपा का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित करता है. स्कूलों की छुट्टियां इसी समय होती हैं, बाजारों का समय बदल जाता है और लोग घर के अंदर रहना ज्यादा पसंद करते हैं. शहरों में जहां एसी और कूलर का सहारा मिलता है, वहीं गांवों में लोग पेड़ों की छांव और मिट्टी के घरों से ही राहत पाने की कोशिश करते हैं. यही वजह है कि नौतपा हर किसी के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आता है.

नौतपा सिर्फ गर्मी का एक दौर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और ज्योतिष के बीच के गहरे संबंध को भी दर्शाता है. यह समय हमें न सिर्फ अपनी दिनचर्या बदलने का मौका देता है, बल्कि पर्यावरण और जरूरतमंदों के प्रति जिम्मेदारी निभाने की भी याद दिलाता है.

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