क्या बिना नहाए वर्क फ्रॉम होम में काम करना सही, यहां जानिए सही तरीका
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सुबह उठते ही लैपटॉप खोलना आज की मजबूरी बन गया है, लेकिन क्या बिना नहाए काम शुरू करना सही है? बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य कहते हैं कि स्नान, पूजा और स्वच्छ मन से काम शुरू करना शुभ माना जाता है. इससे सकारात्मक ऊर्जा एकाग्रता और सफलता मिलती है. वास्तु के अनुसार ईशान कोण में बैठकर काम करना सबसे उत्तम है.
फरीदाबाद: सुबह के 5 बज रहे हैं. अलार्म बजता है, आंख खुलते ही हाथ लैपटॉप की तरफ बढ़ जाते हैं. वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए यह रोज की बात है. कई लोगों की शिफ्ट इतनी सुबह शुरू हो जाती है कि उठते ही काम पर बैठना मजबूरी बन जाता है. लेकिन क्या बिना नहाए-धोए लैपटॉप चलाना सही है? क्या इसका वास्तु और धार्मिक दृष्टि से कोई असर पड़ता है? यही सवाल आजकल काफी लोगों के मन में है.
काम शुरू करने से पहले शरीर और मन की शुद्धता जरूरी
Local18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि कर्म ही पूजा है. हर व्यक्ति के लिए उसका काम सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन काम शुरू करने से पहले शरीर और मन की शुद्धता भी उतनी ही जरूरी है. सुबह उठने के बाद सबसे पहले नित्य क्रिया करनी चाहिए और उसके बाद स्नान करना चाहिए. स्नान से शरीर तरोताजा होता है और रातभर शरीर पर जमा बैक्टीरिया भी साफ हो जाते हैं. इससे मन शांत होता है और व्यक्ति पूरे ध्यान से अपने काम पर लग पाता है.
स्नान और पूजा-पाठ के बाद ही लैपटॉप ऑन करना शुभ
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया कि लैपटॉप आज के समय में केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि यह हमारी रोजी-रोटी का साधन है. जिस तरह हम अपने कार्यस्थल और औजारों का सम्मान करते हैं, उसी तरह लैपटॉप को भी आदर देना चाहिए. स्नान और पूजा-पाठ के बाद ही लैपटॉप ऑन करना शुभ माना जाता है. इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और कार्य में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है.
लैपटॉप चलाने के लिए घर में एक निश्चित स्थान होना चाहिए
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार लैपटॉप चलाने के लिए घर में एक निश्चित स्थान होना चाहिए. इसे उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना सबसे उत्तम माना जाता है. यह दिशा ज्ञान, एकाग्रता और सकारात्मकता की प्रतीक मानी जाती है. जहां साफ-सफाई हो और शांत वातावरण हो, वहां बैठकर काम करने से मन भी स्थिर रहता है. बेड पर बैठकर लैपटॉप चलाना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना गया है.
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने यह भी कहा कि कई लोग नींद से उठते ही बिना हाथ-मुंह धोए काम शुरू कर देते हैं, जो ठीक नहीं है. यदि आपकी शिफ्ट सुबह पांच बजे शुरू होती है, तो बेहतर होगा कि आप एक घंटा पहले उठें, स्नान करें, थोड़ी पूजा करें और फिर अपने कार्य की शुरुआत करें. इससे न केवल शारीरिक शुद्धता बनी रहती है, बल्कि मानसिक रूप से भी आप अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं.
तकनीक भी भगवान विश्वकर्मा की देन
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया कि तकनीक भी भगवान विश्वकर्मा की देन है. इसलिए अपने कार्य उपकरणों का सम्मान करना चाहिए. शुद्ध मन, स्वच्छ शरीर और सकारात्मक भाव से जब आप लैपटॉप खोलते हैं, तो दिन भी अच्छा बीतता है और काम में भी सफलता मिलती है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें


