शादी कब होगी? कुंडली से कैसे पता करें विवाह का समय, समझें लव या अरेंज मैरिज के बनते संकेत
Vivah Yog: शादी को लेकर हर किसी के मन में एक सवाल जरूर उठता है-आखिर मेरा विवाह कब होगा? कोई 25 की उम्र में शादी कर लेता है तो कोई 35 पार कर जाता है, लेकिन सही साथी नहीं मिल पाता. ऐसे में ज्योतिष एक ऐसा रास्ता दिखाता है, जहां जन्म कुंडली के जरिए इस सवाल का जवाब तलाशा जा सकता है. ग्रहों की चाल, दशा और भावों का तालमेल यह बताता है कि शादी जल्दी होगी या देरी से. कई बार सब कुछ सही होते हुए भी विवाह में रुकावट आती है, तो उसके पीछे भी कुंडली का गहरा संबंध होता है, अगर समय रहते इन संकेतों को समझ लिया जाए, तो जीवन की दिशा काफी हद तक साफ हो सकती है.
कुंडली में छिपा है विवाह का पूरा गणित
जन्म कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं और हर भाव का अपना अलग महत्व होता है. विवाह के लिए सबसे अहम माना जाता है सप्तम भाव यानी सातवां घर. यही भाव आपके जीवनसाथी, शादी और रिश्तों की स्थिति को दिखाता है, अगर सप्तम भाव मजबूत हो, उसका स्वामी ग्रह अच्छी स्थिति में हो, तो शादी में ज्यादा रुकावट नहीं आती, लेकिन अगर इस भाव पर अशुभ ग्रहों का असर हो, तो चीजें उलझने लगती हैं.
प्रेम विवाह का संकेत कैसे मिलता है?
अगर कुंडली में पंचम भाव (प्रेम) और सप्तम भाव (विवाह) के स्वामी ग्रह आपस में जुड़े हों या एक साथ बैठे हों, तो प्रेम विवाह का योग बनता है. कई बार ऐसे लोग अपने पसंद के साथी से शादी करते हैं, लेकिन हर बार यह योग सफल नहीं होता.
जब ग्रह बनाते हैं रुकावट
अब एक दिलचस्प लेकिन थोड़ा पेचीदा मामला समझिए. मान लीजिए कुंडली में सप्तमेश और द्वितीय भाव का स्वामी अपनी ही राशि में बैठे हैं, जो कि अच्छा संकेत है, लेकिन उसी जगह शनि और मंगल भी मौजूद हों, तो यह स्थिति बिगड़ सकती है.
1. शनि-मंगल का साथ क्यों बनाता है परेशानी?
ज्योतिष में शनि और मंगल का एक साथ होना ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता. इसे कई बार टकराव वाला योग भी कहा जाता है. ऐसे में भले ही प्रेम विवाह का संकेत हो, लेकिन रिश्ते में तनाव, देरी या टूटने जैसी स्थिति बन सकती है.
2. राहु-केतु का असर: शादी में देरी या टूटन
अगर कुंडली के सप्तम भाव में राहु बैठा हो और उस पर केतु की नजर हो, तो यह वैवाहिक जीवन के लिए चुनौती भरा समय ला सकता है.
ऐसे मामलों में देखा गया है कि
-शादी में बहुत देर होती है
-रिश्ता बनने के बाद टूट जाता है
-या शादी के बाद अलगाव की नौबत आ जाती है
एक आम उदाहरण
कई लोग ऐसे मिल जाएंगे जिनकी शादी काफी देर से होती है, और कुछ मामलों में तो 40 साल की उम्र भी पार हो जाती है. वजह? कुंडली में शनि, राहु और केतु का असर.
शादी में देरी क्यों होती है?
अगर सप्तम भाव का स्वामी शनि के साथ बैठा हो और दोनों में आपसी विरोध हो, तो शादी में देरी लगभग तय मानी जाती है.
ऐसे लोग अक्सर कहते हैं-
“सब कुछ ठीक है, लेकिन बात बनते-बनते रह जाती है.”
यह वही स्थिति होती है जहां ग्रह अपनी चाल चल रहे होते हैं.
क्या उपाय से बदल सकता है समय?
ज्योतिष सिर्फ समस्या नहीं बताता, रास्ता भी दिखाता है, अगर बचपन या युवावस्था में ही कुंडली का सही विश्लेषण हो जाए, तो जिन ग्रहों की वजह से रुकावट आ रही है, उनके उपाय शुरू किए जा सकते हैं.
जैसे-
-शनि की शांति के उपाय
-मंगल दोष का निवारण
-राहु-केतु के लिए विशेष पूजा
इन उपायों से कई बार शादी का समय जल्दी आ सकता है या रिश्तों में स्थिरता आ सकती है.
कुंडली सिर्फ भविष्य बताने का जरिया नहीं, बल्कि जीवन को समझने का एक तरीका भी है. शादी जैसे बड़े फैसले में अगर ग्रहों के संकेत समझ लिए जाएं, तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


