राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते…लखबीर सिंह लक्खा का सुपरहिट भजन

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते…लखबीर सिंह लक्खा का सुपरहिट भजन

Ram Ji Ke Sath Jo Hanuman Nahi Hote Lyrics: प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा ने कई सुपरहिट भजन और भक्ति गीत गाए हैं, उनमें राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते…भजन भी काफी लोकप्रिय है. इस भजन में उन्होंने रामायण में हनुमान जी की महत्ता को बताया है कि भगवान रुद्र ने वीर बजरंगबली का अवतार क्यों लिया. जब भी प्रभु श्री राम का नाम आता है तो उनके परम भक्त हनुमान का भी नाम बरबस ही स्मरण हो आता है. हनुमान जी ने राम नाम की भक्ति को ऐसे स्थापित किया है, जो आज तक अमिट है. राम के बिना हनुमान की कल्पना अधूरी है, हनुमान जी का जन्म ही राम जी के कार्य को पूरा करने के लिए हुआ था. उसी बात को इस भजन में बताया गया है. राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते…भजन की पूरी लिरिक्स नीचे दी गई है.

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते (Ram Ji Ke Sath Jo Hanuman Nahi Hote Lyrics)

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते,
राम जी के पुरे काम नहीं होते…

हनुमान पर्वत उठा कर ना लाते,
कैसे संजीवन सुषेण वेद पाते,
प्राण जाते लक्षण के राम रहते रोते,
राम जी के पुरे काम नहीं होते,

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते,
राम जी के पुरे काम नहीं होते…

लंका में अगर हनुमान नहीं जाते,
और राम की शरण में विभिषण ना आते ,
रावण से विजय श्री राम नहीं होते ,
राम जी के पुरे काम नहीं होते,

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते,
राम जी के पुरे काम नहीं होते…

रावण की लंका अगर न जलाते ,
हनुमान विकराल रूप न दिखाते,
सीता रह जातीं वहीं राम उन्हें खोते,
राम जी के पुरे काम नहीं होते,

राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते,
राम जी के पुरे काम नहीं होते…

भजन का अर्थ

इस मधुर और सुंदर भजन का अ​र्थ है कि हनुमान जी नहीं होते, तो भगवान राम के काम अधूर रह जाते. अगर हनुमान जी नहीं होते तो संजीवनी बूटी और सुषेण वैद्य को कौन लाता? ऐसे में लक्ष्मण जी के प्राण निकल जाते और राम जी भाई के वियोग में रोते रहते.

ऐसे ही हनुमान जी लंका में नहीं जाते और रावण के छोटे भाई विभीषण राम जी की शरण में नहीं आते तो फिर दशानन पर राम जी की जीत नहीं हो पाती.

यदि हनुमान जी लंका दहन नहीं करते और वे अपना विकराल स्वरूप धारण करके लंका को तहस-नहस नहीं करते, सीता जी का पता नहीं लगाते तो जानकी जी लंका में रह जातीं और प्रभु राम उनको प्राप्त नहीं कर पाते. हनुमान जी नहीं होते तो राम जी के काम पूरे नहीं होते.

यह भजन वीर हनुमान जी के पराक्रम और महिमा के वर्णन में लिखा गया है, लेकिन हनुमान जी के जन्म का उद्देश्य ही राम काज के लिए हुआ था. इसीलिए रामायण में हनुमान जी के संदर्भ में लिखा है- “राम काज कीन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम”

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