वैष्णो देवी जा रहे हैं तो सावधान! भूलकर भी यहां न खरीदें माता को चढ़ाने वाली चांदी
Vaishno Devi Silver Scam: माता वैष्णो देवी की यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक होती है. लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और चढ़ावे में कुछ न कुछ जरूर अर्पित करते हैं. लेकिन अगर यही चढ़ावा धोखे में बदल जाए तो? हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली जांच ने श्रद्धालुओं के भरोसे को हिला दिया है. चांदी के नाम पर जो चीज़ खरीदी जा रही है, वह असल में खतरनाक धातुओं का मिश्रण निकली. यह सिर्फ आर्थिक धोखा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है. ऐसे में सवाल उठता है क्या श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है?
चांदी के नाम पर मिलावट का बड़ा खेल
वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली चांदी को लेकर हाल ही में एक बड़ी जांच हुई. इसमें पता चला कि जो चांदी श्रद्धालु खरीद रहे हैं, उसमें असली चांदी की मात्रा बेहद कम है. कई मामलों में यह सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत तक ही पाई गई. बाकी हिस्सा कैडमियम और लोहे जैसे सस्ते और खतरनाक धातुओं से भरा हुआ था.
20 टन चांदी की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े
मंदिर प्रशासन द्वारा लगभग 20 टन चांदी को सरकारी टकसाल में जांच के लिए भेजा गया था. उम्मीद थी कि इससे सैकड़ों करोड़ रुपये की असली चांदी निकलेगी. लेकिन शुरुआती रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया. अनुमानित 500 करोड़ रुपये की चांदी में से केवल करीब 30 करोड़ रुपये की असली चांदी ही सामने आई.
कैडमियम: दिखने में चांदी, असल में ज़हर
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
कैडमियम एक ऐसी धातु है जो देखने में चांदी जैसी लगती है, लेकिन बेहद जहरीली होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. जब इसे पिघलाया जाता है, तो इससे निकलने वाला धुआं और भी खतरनाक हो जाता है. इससे काम करने वाले श्रमिकों की जान तक खतरे में पड़ सकती है.
नियमों के बावजूद खुलेआम इस्तेमाल
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार, उपभोक्ता उत्पादों में कैडमियम का इस्तेमाल प्रतिबंधित है. इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में इसका उपयोग होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है.
कहां से आ रही है नकली चांदी?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मिलावट मुख्य रूप से कटरा और वैष्णो देवी मार्ग के आसपास की दुकानों में हो रही है. श्रद्धालु अक्सर यात्रा के दौरान वहीं से चांदी के सिक्के या आभूषण खरीदते हैं, बिना यह जांचे कि वह असली है या नहीं. दिलचस्प बात यह है कि तिरुपति या सिद्धिविनायक जैसे अन्य बड़े मंदिरों में इस तरह की शिकायतें सामने नहीं आई हैं.
70 किलो में सिर्फ 3 किलो असली
एक उदाहरण ने इस घोटाले की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया. टकसाल में भेजे गए 70 किलो चांदी के एक बैच में से सिर्फ 3 किलो ही असली चांदी निकली. बाकी पूरी तरह मिलावटी थी. इसे अलग करने में महीनों का समय लगा.
प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल
इस मामले को लेकर टकसाल अधिकारियों ने कई बार मंदिर बोर्ड और प्रशासन को सूचित किया. बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. यही वजह है कि यह फर्जीवाड़ा लगातार जारी है और श्रद्धालु अनजाने में इसका शिकार बन रहे हैं.
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सावधानी
वैष्णो देवी यात्रा पर जाने वाले लोगों के लिए यह खबर एक चेतावनी है. चांदी खरीदते समय सिर्फ भरोसे के आधार पर निर्णय न लें. प्रमाणित दुकानों से ही खरीदारी करें और संभव हो तो बिल जरूर लें. आस्था के नाम पर किसी भी तरह का समझौता न करें.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


