मेष संक्रांति कर करें इन चीजों का दान, पितृदोष से मिलेगी मुक्ति
Last Updated:
14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषाचार्य के अनुसार पितृदोष से मुक्ति के लिए इस दिन सत्तू, घड़ा, छाता और चप्पल का दान अत्यंत शुभ है. जरूरतमंदों को भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.
देवघर: जब भी सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस घटना को संक्रांति कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इसका विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है और उनके राशि परिवर्तन का सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है. अब कुछ ही दिनों में सूर्य मेष राशि में प्रवेश करने वाले हैं, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है. इस साल 14 अप्रैल को यह शुभ संक्रांति मनाई जाएगी.सनातन धर्म में मेष संक्रांति को बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से नए कार्यों की शुरुआत करना बेहद फलदायी माना जाता है.
मेष संक्रांति से शुरू हो जाएगा मांगलिक कार्य:
मेष संक्रांति को खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इस दिन से शुभ और मांगलिक कार्यों का आरंभ किया जा सकता है. विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या कोई भी महत्वपूर्ण कार्य इस दिन शुरू करना लाभकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है. साथ ही, यह दिन दान-पुण्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया दान कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, मेष संक्रांति का दिन पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए भी बहुत खास होता है. उन्होंने बताया कि जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष होता है, उन्हें इस दिन विशेष उपाय जरूर करने चाहिए. अगर कोई व्यक्ति अपने पितरों को प्रसन्न करना चाहता है और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करना चाहता है, तो इस दिन कुछ विशेष चीजों का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है.ज्योतिषाचार्य के अनुसार, मेष संक्रांति के दिन पितरों के नाम से ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद और असहाय व्यक्ति को भोजन कराना चाहिए. इसके साथ ही सत्तू, घड़ा, चप्पल और छाता जैसी वस्तुओं का दान करना चाहिए.ये सभी चीजें गर्मी के मौसम में उपयोगी होती हैं, इसलिए इनका दान करना पुण्यदायी माना गया है.मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को पितृदोष से मुक्ति मिलती है.
पितृों के प्रसन्न रहने से घरों में बढ़ती सुख-समृद्धि:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब पितृ प्रसन्न होते हैं तो वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं. इससे व्यक्ति के जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, भाग्य का साथ मिलता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है और परिवार में खुशहाली आती है.इसलिए इस पवित्र दिन पर दान-पुण्य और पितरों का स्मरण करना बेहद जरूरी माना गया है. मेष संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह आस्था, श्रद्धा और शुभ कार्यों का विशेष पर्व है. इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं. इसलिए इस अवसर को नजरअंदाज न करें और पूरे श्रद्धा भाव से दान-पुण्य कर अपने जीवन को सुखमय और सफल बनाने का प्रयास करें.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.


