उज्जैन में बनी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पहुंचेगी काशी, ग्रह-नक्षत्र, चंद्र स्थिति के साथ दे
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पहुंचेगी काशी, चंद्र स्थिति के साथ देगी पूरी जानकारी
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Vikramaditya Vedic Clock: काशी विश्वनाथ में अब विक्रमादित्य वैदिक घड़ी लगाई जाएगी. इस घड़ी में वैदिक समय, ग्रह-नक्षत्र, चंद्र स्थिति और विक्रम संवत की पूरी जानकारी एक साथ उपलब्ध होगी. घड़ी के समर्थकों का कहना है कि इस पहल से युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे समझ पाएंगे कि समय मापने की आधुनिक पद्धति से पहले भारत में किस तरह सूक्ष्म और वैज्ञानिक तरीके से समय का निर्धारण किया जाता था. यह घड़ी भारतीय सभ्यता के वैज्ञानिक योगदान की याद भी दिलाती है.
Vikramaditya Vedic Clock: प्राचीन भारतीय समय-ज्ञान और वैदिक गणित पर आधारित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी इन दिनों चर्चा में है. यह घड़ी भारतीय पंचांग और सूर्य की स्थिति के आधार पर समय की गणना करने की पारंपरिक पद्धति को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करती है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह घड़ी भारतीय खगोलशास्त्र की वैज्ञानिकता और स्वदेशी ज्ञान परंपरा को सामने लाने का प्रयास है. मध्य प्रदेश स्थित महाकाल की नगरी उज्जैन में बनी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब काशी पहुंचेगी. राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को वाराणसी पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की मौजूदगी में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को सबसे पहले बाबा विश्वनाथ को अर्पित करेंगे.

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की पहली वैदिक काल गणना पर आधारित विशेष घड़ी है. साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया था. घड़ी सूर्योदय के आधार पर समय गणना करती है और पंचांग से जुड़ी जानकारी देती है. विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की खासियत यह है कि यह केवल घंटे और मिनट नहीं, बल्कि दिन, ग्रह-नक्षत्र, तिथि, पक्ष और मास जैसे वैदिक समय-निर्धारण के तत्वों को भी दर्शाने की अवधारणा पर आधारित है. इसके डिजाइन और कार्यप्रणाली में सूर्यसिद्धांत, वैदिक गणित और प्राचीन ज्योतिषीय सिद्धांतों का उपयोग किया गया है. इससे उपयोगकर्ता को ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ-साथ वैदिक समय की समझ भी मिल सकती है.

भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास के अंतर्गत वाराणसी में सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को वैदिक घड़ी समर्पित की जाएगी. इस घड़ी की विशेषता ना केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति है, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है. दरअसल इस घड़ी का नाम राजा विक्रमादित्य पर रखा गया है क्योंकि विक्रम संवत की शुरुआत इन्ही राजा ने की थी. यही विक्रम संवत आज भी भारतीय पंचांग की नींव है.
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विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है. वैदिक घड़ी पर साल 2013 से काम शुरू हो गया था और साल 2020 में इसका फॉर्मूला तैयार किया था. अब इस घड़ी और मोबाइल ऐप की मदद से हर शहर के लिए अलग अलग वैदिक समय की सटीक गणना संभव हो पाएगी. यह एप भारतीय भाषाओं के साथ वैश्विक 40 भाषाओं में देखा जा सकता है. यह घड़ी सूर्योदय के साथ ऑपरेट होती है, जिस स्थान पर सूर्योदय का समय जो होगा, उस स्थान की काल गणना उस स्टेंडर्ड टाइम से जुड़ा रहेगा.

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा. आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां भी लगाई जा रही हैं. सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की प्रस्तुति लगभग 1.45 घंटे की होगी. मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे.


