वैशाख आज से प्रारंभ, इसमें हर दिन स्नान क्यों है जरूरी? जानें शास्त्रों के नियम
वैशाख आज से प्रारंभ, इसमें हर दिन स्नान क्यों है जरूरी?जानें शास्त्रों के नियम
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Vaishakh Snan 2026 Niyam: हिन्दू नववर्ष का दूसरा महीना वैशाख आज 3 अप्रैल से शुरू है. वैशाख को माधव मास भी कहते हैं, इसलिए इसमें भगवान विष्णु और जल देवता की पूजा करते हैं. वैशाख में प्रतिदिन स्नान करने का विधान है. आइए जानते हैं कि वैशाख में रोज स्नान करने से क्या होता है? वैशाख में स्नान और पूजा के नियम क्या हैं?
वैशाख माह में स्नान के नियम. (Photo: AI)
वैशाख में रोज क्यों करना चाहिए स्नान?
व्रत परिचय के अनुसार, चैत्र शुक्ल पूर्णिमा से लेकर वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तक प्रतिदिन सुबह में स्नान करना चाहिए. अगर संभव हो तो सूर्योदय से पूर्व किसी तीर्थ स्थान के नदी या कुआं, सरोवर पर स्नान करना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं है तो आप अपने घर पर ही शुद्ध जल से स्नान कर सकते हैं. वैशाख में रोज स्नान करने से हर प्रकार के रोग और दोष मिट जाते हैं, पुण्य बढ़ता है और प्रभाव में वृद्धि होती है.
वैशाख में स्नान और पूजा के नियम
- वैशाख माह में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए.
- ब्रह्म मुहूर्त को स्नान के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है.
- सुबह में स्नान के लिए पानी भर लें, उसमें गंगाजल मिला लें.
- उसके बाद अपने इष्ट देव के नाम का स्मरण करते हुए स्नान करें.
- स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु की पूजा करें.
- पूजा के समय ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र या फिर हरे राम हरे राम का जाप करें.
- इन मंत्रों का जाप आप 108, 1008 या अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते हैं.
- मंत्र का जाप करने के बाद इस माह में एक बार ही भोजन करें.
- इस प्रकार से आपको 31 दिनों तक वैशाख में स्नान और पूजा करनी चाहिए.
वैशाख में मेष संक्रांति का स्नान
वैशाख माह में मेष संक्रांति का पर्व आता है. सूर्य देव जब अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं तो उस समय मेष संक्रांति होती है. मेष संक्रांति के दिन स्नान और दान करने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है. इस साल मेष संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल दिन मंगलवार को है. इस दिन सूर्य देव मेष राशि में सुबह 9 बजकर 39 मिनट पर प्रवेश करेंगे, उस समय मेष संक्रांति का क्षण है.
वैशाख माह का महत्व
वैशाख माह को माधव मास भी कहा जाता है. इस वजह से इस माह में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं क्योंकि वे वैशाख माह के प्रतिनिधि देवता हैं. इनके साथ जल देवता की भी पूजा का विधान है. वैशाख में स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जो कभी खत्म नहीं होता है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें


