किस उंगली से लगाते हैं तिलक? गलत उंगली इस्तेमाल पड़ सकता है भारी! जानिए किस्मत बदलने वाला
Last Updated:
Tilak Lagane Ka Sahi Tarika: माथे पर तिलक लगाना हममें से अधिकांश लोगों के लिए रोज़मर्रा की आदत जैसा है सुबह पूजा के बाद, मंदिर जाते समय, या किसी शुभ काम की शुरुआत में. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस उंगली से आप तिलक लगाते हैं, वही उसके असर को बदल सकती है? यह सुनने में थोड़ा असामान्य लग सकता है, मगर पारंपरिक मान्यताओं और वास्तु विचारों के अनुसार हर उंगली का अपना अलग महत्व होता है. ऐसे में अगर तिलक सही तरीके और सही उंगली से लगाया जाए, तो यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं रहता, बल्कि यह आपके आत्मविश्वास, ऊर्जा और सोच पर भी असर डाल सकता है.
तिलक और उंगलियों का गहरा संबंध भारतीय परंपरा में हर उंगली को किसी न किसी ग्रह और तत्व से जोड़ा गया है. यह संबंध केवल ज्योतिष तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और मानसिक स्थिति से भी जुड़ा माना जाता है. यही वजह है कि तिलक लगाते समय उंगली का चयन मायने रखता है.

तर्जनी उंगली: निर्णय और दिशा की उंगली तर्जनी उंगली को अक्सर मार्गदर्शन की उंगली कहा जाता है. यह गुरु तत्व से जुड़ी मानी जाती है. अगर आप इस उंगली से सिंदूर या चंदन का तिलक लगाते हैं, तो इसे करियर और फैसलों में स्पष्टता लाने वाला माना जाता है. कई लोग इंटरव्यू या किसी महत्वपूर्ण मीटिंग से पहले इसी उंगली से तिलक लगाना पसंद करते हैं मानो एक छोटा-सा आत्मविश्वास का टॉनिक.

मध्य उंगली: संतुलन और अनुशासन मध्य उंगली शनि से जुड़ी मानी जाती है, जो जीवन में अनुशासन और संतुलन का प्रतीक है. इस उंगली से भस्म या विभूति का तिलक लगाने से मन शांत रहता है ऐसा विश्वास है. अगर आपका दिन बहुत व्यस्त रहता है या आप तनाव से जूझते हैं, तो यह तरीका आपको थोड़ी मानसिक स्थिरता दे सकता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

अनामिका उंगली: आकर्षण और ऊर्जा का केंद्र अनामिका उंगली को अक्सर शुभ कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. यह शुक्र से जुड़ी होती है, जो आकर्षण और सौंदर्य का प्रतीक है. हल्दी या केसर से इस उंगली द्वारा तिलक लगाने से आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की बात कही जाती है. शादी-ब्याह या किसी खास मौके पर अक्सर लोग इसी उंगली का इस्तेमाल करते हैं और शायद आपने भी अनजाने में ऐसा किया हो.

छोटी उंगली: संवाद और समझ छोटी उंगली बुध ग्रह से जुड़ी होती है, जो संवाद और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है. तुलसी के रस या चंदन से इस उंगली से तिलक लगाने को कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर करने वाला माना जाता है. आज के समय में, जहां बातचीत और अभिव्यक्ति का महत्व बढ़ गया है, यह मान्यता लोगों को खास आकर्षित करती है.

बदलती जिंदगी में पुरानी परंपरा का नया अर्थ आज के दौर में जहां विज्ञान और तर्क की बात होती है, वहीं ऐसी परंपराएं लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम भी करती हैं. भले ही हर कोई इन मान्यताओं को पूरी तरह न माने, लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक असर जरूर महसूस किया जा सकता है. आखिरकार, जब आप किसी काम को विश्वास के साथ करते हैं, तो उसका असर आपके व्यवहार में दिखता ही है.

तिलक लगाने का तरीका भी उतना ही जरूरी केवल सही उंगली चुनना ही काफी नहीं है, तिलक लगाने का तरीका भी अहम भूमिका निभाता है. परंपरा के अनुसार, तिलक को हल्के गोल घुमाव में माथे पर लगाना चाहिए. ऐसा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है ऐसा माना जाता है. कई लोग बताते हैं कि इस छोटे-से अभ्यास से उन्हें दिन की शुरुआत अधिक संतुलित और केंद्रित महसूस होती है.


