Chaitra Navratri 2026: मां भगवती के इस शक्तिपीठ में बिना मूर्ति के होती है माता की पूजा, ज

Chaitra Navratri 2026: मां भगवती के इस शक्तिपीठ में बिना मूर्ति के होती है माता की पूजा, ज

होमताजा खबरधर्म

चैत्र नवरात्रि आज से शुरू, इस शक्तिपीठ में बिना मूर्ति के होती है माता की पूजा

Last Updated:

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज से हो रही है और मां दुर्गा के पहले स्वरूप की पूजा अर्चना की जा रही है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां माता की कोई मूर्ति नहीं है, बिना मूर्ति के ही यहां माता रानी की पूजा की जाती है. यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में…

Zoom

Chaitra Navratri 2026: आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप की पूजा घर-घर की जा रही है. सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का खास महत्व है. हर साल यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार की शुरुआत 19 मार्च से हो चुकी है और समापन 27 मार्च को होगा. चैत्र नवरात्रि में नौ दिन देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के दौरान देशभर के माता के मंदिरों की रौनिक अद्भुत होती है. देवी के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी तादाद में भीड़ देखी जाती है, जो माता के दर्शन के लिए उनके द्वार पर आते हैं.

मंदिर में माता की प्रतिमा नहीं
देश के उन्हीं मंदिरों में से एक यूपी के प्रयागराज के अलोपीबाग इलाके में स्थित अलोपी शंकरी देवी शक्तिपीठ मंदिर है. इस मंदिर की खासियत है कि यहां माता की मूर्ति के बिना उनकी पूजा की जाती है, जो कि अपने आप में एक अद्भुत दृश्य होता है. नवरात्रि के समय अलोपी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी तादाद में भीड़ उमड़ती है. हालांकि, मंदिर में माता की प्रतिमा ना होने के कारण यहां नवरात्रि के समय उनका श्रृंगार तो नहीं होता लेकिन विधि के अनुसार पूरे नौ दिन उनके अलग-अलग स्वरूपों का पाठ किया जाता है.

51 शक्तिपीठों में से एक अलोपी देवी शक्तिपीठ मंदिर
इस मंदिर को अलोपी देवी मंदिर, मां अलोपशंकरी का सिद्धपीठ मंदिर और ललिता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. अलोपी देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के दौरान व्रत रखकर यहां पूजा अर्चना करने से मां भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती हैं और हर परेशानियों से बचाती हैं. मान्यता है कि मां सती की कलाई इसी स्थान पर गिरी थी, इसलिए माता का आशीर्वाद लेने मंदिर में आए भक्त उसी कुंड से जल लेकर उनके पालने पर चढ़ाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं.

अलोपी देवी शक्तिपीठ से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां मां सती के दाहिने हाथ का पंजा एक कुंड में गिरकर अदृश्य हो गया था. इसलिए इस मंदिर को देवी अलोपशंकरी के नाम से जाना जाता है. मंदिर में देवी का स्वरूप नहीं है, लेकिन प्रांगण के बीच में एक कुंड बना हुआ है, जिसके ऊपर चांदी का एक खास झूला या पालना बना हुआ है, जिसे लाल कपड़े से ढंक कर रखा जाता है और उसकी पूजा की जाती है.

About the Author

authorimg

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



Source link

You May Have Missed