गिलास में बचा पानी छोड़ना पड़ सकता है भारी! जानिए इस आदत का आपके जीवन पर क्या होता है असर?

गिलास में बचा पानी छोड़ना पड़ सकता है भारी! जानिए इस आदत का आपके जीवन पर क्या होता है असर?

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Vastu Tips for Drinking Water: क्या आप भी गिलास में पानी अधूरा छोड़ देते हैं? तो संभल जाइए. आपकी यह छोटी-सी आदत आपके ‘चंद्रमा’ को नाराज कर सकती है. ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने बताया कि वास्तु शास्त्र में पानी को मन के स्वामी चंद्रमा से जोड़ा गया है. पानी अधूरा छोड़ना न केवल ऊर्जा के प्रवाह को रोकता है, बल्कि मानसिक अशांति और घर में नकारात्मकता का कारण भी बन सकता है. जानिए क्यों बड़े-बुजुर्ग हमेशा गिलास का पानी पूरा खत्म करने की सलाह देते हैं और इसका आपकी तरक्की व मानसिक संतुलन से क्या सीधा संबंध है.

ऋषिकेश: गिलास पर आधा पानी से चंद्रमा नाराज़ हो जाते हैं? यह सवाल सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन भारतीय परंपराओं और वास्तु शास्त्र में ऐसी कई मान्यताएं हैं जो हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़ी होती हैं. इन्हीं में से एक है पानी को अधूरा छोड़ देना. अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि गिलास में जितना पानी लो, उसे पूरा पीना चाहिए. लेकिन क्या इसके पीछे सिर्फ शिष्टाचार है या फिर कोई गहरा आध्यात्मिक और ऊर्जा से जुड़ा कारण भी है.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी केवल एक साधारण तत्व नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा का वाहक माना जाता है. इसका सीधा संबंध चंद्रमा से जोड़ा जाता है. चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक माना गया है. जब आप किसी के घर जाते हैं और वे आपको पानी ऑफर करते हैं, तो वह सिर्फ मेहमाननवाजी नहीं होती, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान भी होता है. ऐसे में अगर आप उस पानी को अधूरा छोड़ देते हैं, तो यह उस ऊर्जा के प्रवाह को बीच में ही रोकने जैसा माना जाता है.

मानसिक संतुलन पर पड़ता है असर
उन्होंने बताया कि अधूरा पानी छोड़ना नकारात्मक संकेत दे सकता है. इससे घर के वातावरण में हल्की-सी अशांति या असंतुलन आ सकता है. भारतीय संस्कृति में ऊर्जा और भावनाओं के स्तर पर इन बातों को बहुत महत्व दिया जाता है. खासकर जब बात अतिथि और मेजबान के संबंध की हो, तो हर छोटी-सी बात भी एक संदेश देती है. अधूरा पानी छोड़ना कभी-कभी अनादर या लापरवाही का प्रतीक भी माना जा सकता है. इसके अलावा, पानी को चंद्रमा से जोड़कर यह भी कहा जाता है कि यदि आप बार-बार पानी अधूरा छोड़ते हैं, तो इसका असर आपके मानसिक संतुलन पर भी पड़ सकता है. चंद्रमा मन का स्वामी है और पानी उसका प्रतिनिधि तत्व. ऐसे में इस तत्व का अपमान या अनदेखी करने से मन में बेचैनी, अस्थिरता या नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं.
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बचाव के आसान तरीके
अखिलेश पांडेय का कहना है कि हमें अपनी आदतों में छोटे बदलाव करने चाहिए. हमेशा उतना ही पानी लें जितना आप पी सकें. यदि गलती से पानी बच जाए, तो उसे फेंकने के बजाय किसी पौधे में डाल दें ताकि उस तत्व का सदुपयोग हो सके और ऊर्जा का सकारात्मक चक्र बना रहे.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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