एकादशी व्रत क्या है? हर माह में दो बार क्यों होता है एकादशी व्रत? जानें कारण और महत्व

एकादशी व्रत क्या है? हर माह में दो बार क्यों होता है एकादशी व्रत? जानें कारण और महत्व

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एकादशी व्रत क्या है? हर माह में दो बार क्यों होता है एकादशी व्रत? जानें कारण

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What is Ekadashi Vrat: एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. इससे पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. लेकिन कई व्रत माह में एक बार या साल में एक बार आते हैं, जबकि एकादशी व्रत माह में दो बार आता है. इस तरह से पूरे एक साल में 24 एकादशी व्रत होते हैं. ऐसा क्यों? आइए जानते हैं एकादशी व्रत का महत्व.

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एकादशी व्रत को ग्यारस व्रत भी कहा जाता है. (AI)

Lord Vishnu Ekadashi Vart Importance: एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति से जुड़ा उपवास है. यह हर माह में दो बार आता है. इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं. भगवान विष्णु को उनके प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं और संबंधित एकादशी की व्रत कथा सुनते हैं. आरती की जाती है और अगले दिन सुबह में दान पुण्य के बाद पारण करके व्रत को पूरा करते हैं. हर साल में 24 से लेकर 26 एकादशी व्रत पड़ते हैं. आइए जानते हैं कि एकादशी व्रत क्या है? एकादशी महीने में दो बार क्यों होता है? एकादशी व्रत का महत्व क्या है?

एकादशी व्रत क्या है?

पंचांग के अनुसार, हर माह में प्रतिपदा से लेकर चतुर्दशी तक दो बार ये तिथियां आती हैं, 15वें दिन अमावस्या और पूर्णिमा होती हैं. हर तिथि के अपने एक प्रतिनिधि देवी और देवता हैं. एकादशी तिथि के प्रतिनिधि देव भगवान विष्णु हैं. वे जगत के पालनकर्ता हैं. उनकी कृपा से जीवों का उद्धार होता है. जो लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, वे एकादशी तिथि को व्रत और पूजा पाठ करके हरि कृपा प्राप्त करना चाहते हैं. इस वज​ह से हर एकादशी तिथि को वो व्रत रखते हैं. इसे ही एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है. एकादशी को ग्यारस भी कहते हैं, इस आधार पर एकादशी व्रत को ग्यारस व्रत भी कहा जाता है.

एकादशी व्रत हर महीने में दो बार क्यों होता है?

पंचांग के आधार पर देखा जाए तो हर माह के दो पक्ष होते है. प्रतिपदा से अमावस्या तक के पक्ष को कृष्ण पक्ष कहा जाता है, वहीं अमावस्या के बाद की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक को शुक्ल पक्ष कहा जाता है. इन दोनों पक्षों को मिलाकर एक माह पूरा होता है. हर पक्ष में एक एकादशी तिथि आती है. कृष्ण पक्ष में एक एकादशी और शुक्ल पक्ष में एक एकादशी. इस वजह से एक माह में दो एकादशी के व्रत पड़ते हैं.

हर एकादशी के अलग-अलग नाम

हर माह में आने वाले एकादशी व्रत के नाम अलग-अलग होते हैं. जैसे इस समय चैत्र माह का कृष्ण पक्ष चल रहा है तो चैत्र कृष्ण एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं, जो 15 मार्च रविवार को है. वहीं चैत्र शुक्ल एकादशी का कामदा एकादशी एकादशी कहते हैं. हर एकादशी का अपना विशेष महत्व होता है.

एकादशी व्रतों के नाम

  1. षटतिला एकादशी
  2. जया एकादशी
  3. विजया एकादशी
  4. आमलकी एकादशी
  5. पापमोचनी एकादशी
  6. कामदा एकादशी
  7. वरूथिनी एकादशी
  8. मोहिनी एकादशी
  9. अपरा एकादशी
  10. पद्मिनी एकादशी
  11. परम एकादशी
  12. निर्जला एकादशी
  13. योगिनी एकादशी
  14. देवशयनी एकादशी
  15. कामिका एकादशी
  16. श्रावण पुत्रदा एकादशी
  17. अजा एकादशी
  18. परिवर्तिनी एकादशी
  19. इन्दिरा एकादशी
  20. पापांकुशा एकादशी
  21. रमा एकादशी
  22. देवुत्थान एकादशी या देवउठनी एकादशी
  23. उत्पन्ना एकादशी
  24. मोक्षदा एकादशी

एकादशी व्रत का महत्व

  • एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के पाप मिटते हैं और पुण्य लाभ होता है.
  • भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  • आत्मा को भगवान विष्णु के श्री चरणों में स्थान मिलता है, वह जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है.
  • पिशाच योनि से मुक्ति, पितरों के कल्याण आदि के लिए भी एकादशी का व्रत रखा जाता है.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें

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