भूतड़ी अमावस्या कब है? इस दिन हावी रहती हैं नकारात्मक शक्तियां! न करें ये 5 गलतियां

भूतड़ी अमावस्या कब है? इस दिन हावी रहती हैं नकारात्मक शक्तियां! न करें ये 5 गलतियां

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भूतड़ी अमावस्या कब? इस दिन हावी रहतीं नकारात्मक शक्तियां! न करें 5 गलतियां

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Bhutdi Amavasya 2026 Date: भूतड़ी अमावस्या चैत्र कृष्ण अमावस्या तिथि को कहा जाता है. भूतड़ी अमावस्या भूतकाल की आत्माओं से जुड़ा है. उस दिन कुछ गलतियों को तो भूलकर भी नहीं करना चाहिए, वरना नुकसान उठाना पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि भूतड़ी अमावस्या कब है? भूतड़ी अमावस्या पर कौन से काम नहीं करने चाहिए?

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2026 की भूतड़ी अमावस्या कब है?

Bhutdi Amavasya 2026 Date: भूतड़ी अमावस्या का नाम सुनकर ही व्यक्ति थोड़ा असहज हो जाता है. भूतड़ी से लोग इसे भूत से जुड़ा सोचते हैं, जो एक नकारात्मकता संकेत देता है. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. अमावस्या का दिन स्नान, दान, तर्पण, पितृ पूजा, श्राद्ध के लिए होता है. ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियां हावी रहती हैं, इस वजह से लोगों को सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह दिन तंत्र और मंत्र की सिद्धि के लिए उपयुक्त माना जाता है. आइए जानते हैं कि भूतड़ी अमावस्या कब है? इसे भूतड़ी अमावस्या क्यों कहते हैं? भूतड़ी अमावस्या पर कौन सी 5 गलतियां करने से बचना चाहिए?

भूतड़ी अमावस्या किस दिन है?

दृक पंचांग के अनुसार, 18 मार्च बुधवार को सुबह 8:25 बजे से चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू होगी और यह 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर भूतड़ी अमावस्या 19 मार्च गुरुवार को है.

लेकिन भूतड़ी अमावस्या पर श्राद्ध, पिंडदान, दान आदि का कार्य 18 मार्च को किया जाएगा क्योंकि 19 मार्च को भूतड़ी अमावस्या सुबह 6:52 बजे तक ही है, उसके बाद से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी. अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध, पिंडदान, दान आदि दिन में अमावस्या ति​​​थि में 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच करते हैं.

चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या क्यों कहते हैं?

चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या कहते हैं. काल गणना के अनुसार, भूत का अर्थ होता है बीता हुआ समय यानि वह समय, जो बीत चुका है. जो लोग भूतकाल में मर चुके हैं, लेकिन उनकी आत्माएं अभी भी अतृप्त हैं, वे अमावस्या के दिन पितृ लोक से धरती पर आती हैं, ताकि उनके वंश के लोग उनको तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि से तृप्त कर दें. इस अमावस्या के दिन ये आत्माएं उग्र स्वरूप में होती हैं, जो लोग इनको तृप्त नहीं करते हैं, उनको पितृ दोष लगता है, ये पितर कई तरह से उनको परेशान करते हैं.

भूतड़ी अमावस्या पर न करें ये 5 गलतियां

  1. भूतड़ी अमावस्या के दिन पितरों का अपमान न करें. यदि आप अपने पितरों का अपमान करते हैं, तो वे आपकी उन्नति में बाधक बन सकते हैं.
  2. भूतड़ी अमावस्या के अवसर पर पितरों को तर्पण देना न भूलें. जब स्नान कर लें तो उसके बाद कुशा की मदद से जल, काले तिल और सफेद फूल से पितरों को तर्पण करें.
  3. भूतड़ी अमावस्या पर कुत्ता, गाय, कौआ या अन्य पशु-क्षियों को प्रताड़ित न करें. इन को भोजन का एक अंश दें. ऐसी मान्यता है कि इनके माध्यम से भोजन पितरों तक प्राप्त होता है.
  4. यदि आप पितर संतुष्ट नहीं हैं तो भूतड़ी अमावस्या पर उनके लिए पिंडदान या श्राद्ध करना न भूलें. यदि आप उनके लिए पिंडदान या श्राद्ध नहीं करते हैं तो वे नाराज होकर आपको श्राप दे सकते हैं.
  5. भूतड़ी अमावस्या पर दान का भी महत्व है. पितरों के लिए सफेद रंग के बिना सिले हुए कपड़े दान करना चाहिए. इसमें आप धोती, लुंगी, गमछा आदि दान कर सकते हैं.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें

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