काशीपुर के ऐतिहासिक सिद्ध पीठ में भक्तों की भीड़, आज और कल शीतला अष्टमी की विशेष पूजा

काशीपुर के ऐतिहासिक सिद्ध पीठ में भक्तों की भीड़, आज और कल शीतला अष्टमी की विशेष पूजा

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इस सिद्ध पीठ में शीतला अष्टमी की विशेष पूजा, चढ़ता है बसौड़ा का भोग

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Basoda 2026: शीतला अष्टमी यानि बसौड़ा पूजा 11 मार्च बुधवार को है. इस दिन श्री शीतला माता की विशेष पूजा होती है. शीतला अष्टमी को लेकर उत्तराखंड के काशीपुर में श्री शीतला माता मंदिर में अभी से भक्तों की भीड़ लग रही है. आज और कल के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. इस पूजा में बसौड़ा का भोग लगाते हैं.

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उत्तराखंड के काशीपुर में श्री शीतला माता मंदिर में बसौड़ा पूजा. (IANS)

Basoda 2026:  उत्तराखंड के काशीपुर में बसौड़ा पर्व यानि शीतला अष्टमी की आध्यात्मिक लहर देखने को मिल रही है. यहां के ऐतिहासिक सिद्ध पीठ श्री शीतला माता मंदिर में चैत्र मास की द्वितीया तिथि से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है. श्रद्धा और विश्वास के साथ सैकड़ों श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं.

रोगों से मुक्ति का महापर्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शीतला को ‘रोग हरण अवतारी’ माना जाता है. मंदिर के प्रबंधक पंडित संदीप मिश्रा के अनुसार, माता को महाकाली, नगर कोट देवी और मसानी माता जैसे कई पवित्र नामों से पूजा जाता है. ऋतु परिवर्तन के समय होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए मां शीतला की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.

पूजन की परंपरा और अनुष्ठान

मंदिर में सुबह 5:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं. भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए पारंपरिक सामग्री अर्पित करते हैं:

  • हल्दी का तिलक: पवित्रता और स्वास्थ्य के प्रतीक के रूप में.
  • विशेष प्रसाद: कच्चा दूध, नारियल, चना दाल, मसूर, गुड़, आटा, पुए और सरसों का तेल.
  • नमक और हल्दी: स्वच्छता और संक्रमण से मुक्ति के प्रतीक के रूप में अर्पित किए जाते हैं.

आज और कल के लिए विशेष व्यवस्था

पंडित मिश्रा ने बताया कि होली के अगले दिन से बैसाखी तक हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को विशेष पूजा होती है. इस वर्ष 10 और 11 मार्च को मुख्य बसौड़ा पूजन होने के कारण मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी. भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि दर्शन सुचारु रूप से हो सकें.

लगता है बसौड़ा का भोग

बसौड़ा का यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और प्रकृति के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से माता को बासी भोजन यानि बसौड़ा का भोग लगाते हैं, उनके घर से बीमारियां और दरिद्रता दूर भागती हैं.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें

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