अनोखा है 600 साल पुराने बुढ़िया माई मंदिर का इतिहास,  यहां अकाल मृत्यु के संकट से मुक्ति क

अनोखा है 600 साल पुराने बुढ़िया माई मंदिर का इतिहास, यहां अकाल मृत्यु के संकट से मुक्ति क

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अनोखा है 600 साल पुराने बुढ़िया माई मंदिर का इतिहास, हर कष्ट होता है दूर

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Budhiya Mai Mandir Gorakhpur: चैत्र नवरात्रि इस बार 19 मार्च से शुरू और 27 मार्च को समापन हो रहा है. चैत्र नवरात्रि का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी है. यह पर्व नारी शक्ति का प्रतीक है और समाज में महिलाओं की भूमिका और सम्मान को उजागर करता है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर आज हम आपको मातारानी के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां अकाल मृत्यु के संकट से मुक्ति की अटूट मान्यता है…

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Budhiya Mai Mandir Gorakhpur: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है और शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में नव दुर्गा के पूजन की तैयारी शुरू हो चुकी है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. चैत्र नवरात्रि के दौरान, भक्तगण मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं. व्रत और उपवास का पालन किया जाता है और विशेष पूजा, हवन और कन्या पूजन का आयोजन होता है. नवरात्रि के पवित्र मौके पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां मौत से पहले की चेतावनी मिल जाती है और यह सब मां दुर्गा के आशीर्वाद से संभव है. ऐइए जानते हैं माता रानी के इस पवित्र मंदिर के बारे में…

चमत्कारी और सिद्धपीठ मंदिर
देशभर में मां भगवती के कई चमत्कारी और सिद्धपीठ मंदिर मौजूद हैं, जिनकी मान्यताएं भक्तों को माता रानी की चौखट तक खींच लाती हैं, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जो मौत से पहले की चेतावनी देता है? यूपी के गोरखपुर में ऐसा मंदिर है, जो घटित होने वाली घटना के बारे में बताता है.

बुढ़िया माई मंदिर काल का मंदिर
गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में बुढ़िया माई मंदिर है, जो जिला गोरखपुर से 12 किलोमीटर दूर है. जंगल के बीचो-बीच होने के बावजूद भी मंदिर में नवरात्रि के मौके पर भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. माना जाता है कि सिद्धपीठ में शामिल बुढ़िया माई मंदिर काल का मंदिर है, जो अकाल मृत्यु को टालने की क्षमता रखता है और इसकी गवाह है मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा. स्थानीय लोक कथाओं की मानें तो मंदिर के पास एक पुल हुआ करता था, जो बड़े नाले पर बना था. नाले के पास एक दिन बारात आकर रुकी. वहां सफेद साड़ी में मौजूद बुढ़िया ने आकर पुल पर न जाने की सलाह दी, लेकिन बारात के लोग नहीं माने. जैसे ही बारात पुल के बीचों-बीच पहुंची, पुल टूटकर गिर गया और सभी बारातियों की मौत हो गई.

बुढ़िया माई का मंदिर मौजूद
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भविष्यवाणी के बाद बुढ़िया कहां गायब हो गई, किसी को नहीं पता. इसके बाद भी जंगल में रहने वाले जनजातीय लोगों ने बूढ़ी महिला को देखा, लेकिन वह एक पल में ओझल हो जाती थी. इसी पुल के पास आज भी बुढ़िया माई का मंदिर मौजूद है.

600 साल पुराना है मंदिर
मंदिर 600 साल पुराना है, लेकिन आस्था से प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री भी अछूते नहीं हैं. सीएम योगी कई बार मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे हैं. नवरात्रि के समय मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं, और भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए पैदल जंगल की यात्रा भी करते हैं. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को एक बड़ी नदी भी पार करनी होती है, जिसके लिए नाव का प्रबंधन रहता है. मंदिर तक पहुंचने के लिए शहर के मोहद्दीपुर चौराहे से ऑटो या जीप जैसे वाहन का सहारा ले सकते हैं. वाहन आपको एयरपोर्ट होते हुए कुसम्ही जंगल पहुंचाएगा.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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