कुंडली में नहीं है कालसर्प दोष, फिर भी करवा ली है दोष निवारण की पूजा? अब क्या करें, क्या होते हैं इसके नकारात्मक प्रभाव?

कुंडली में नहीं है कालसर्प दोष, फिर भी करवा ली है दोष निवारण की पूजा? अब क्या करें, क्या होते हैं इसके नकारात्मक प्रभाव?

Kalasarpa Dosha: कई बार लोग सुनी-सुनाई बातों के चलते कालसर्प दोष की पूजा करने में हिचकिचाते हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर कुंडली में यह दोष न हो तो पूजा करवाने से कोई नुकसान तो नहीं होगा? ज्योतिष और धर्मशास्त्र के जानकार बताते हैं कि ऐसी पूजा न केवल हानिकारक नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी बन सकती है. आज हम इस लेख में जानेंगे कि बिना दोष के भी कालसर्प पूजा क्यों लाभकारी है, क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं और किस प्रकार यह हमारे जीवन में संतुलन लाती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.

कालसर्प दोष पूजा: क्या है सच?
कालसर्प दोष पूजा का मुख्य उद्देश्य राहु और केतु के प्रभावों को संतुलित करना और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाना है. ज्योतिषियों के अनुसार, यदि यह दोष आपकी कुंडली में न भी हो, तो पूजा करने से कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होता. यह केवल एक सात्विक अनुष्ठान है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है.

सकारात्मक प्रभाव
-मानसिक शांति: पूजा के दौरान शिव मंत्रों का जाप और हवन मानसिक तनाव को कम करता है.
-सकारात्मक ऊर्जा: अनुष्ठान से घर और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
-आध्यात्मिक संतोष: व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि उसने अपने जीवन में धार्मिक और आध्यात्मिक कदम उठाए हैं.

कैसे करें पूजा और दैनिक उपाय
निश्चिंत रहें
भले ही कुंडली में दोष न हो, इस पूजा से किसी तरह का दुष्परिणाम नहीं होता. इसलिए नकारात्मक विचारों को त्याग दें और पूजा को एक सकारात्मक अनुभव के रूप में लें.

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शिव पूजा जारी रखें
-हर सोमवार शिव को जल, दूध या भस्म अर्पित करना शुभ माना जाता है.
-साधारण जीवन में इस पूजा से आत्मिक ऊर्जा बनी रहती है.

सात्विक जीवन अपनाएं
-पूजा के बाद प्याज, लहसुन से परहेज करें.
-सात्विक भोजन और ध्यान मानसिक शुद्धि में मदद करता है.

नकारात्मक प्रभाव: मिथक या वास्तविकता?
बहुत से लोग मानते हैं कि बिना दोष के पूजा करने से नकारात्मक परिणाम आते हैं. यह धारणा पूरी तरह मिथक है. कालसर्प पूजा केवल दोषों को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा लाने का माध्यम है. जब यह शिव की भक्ति के साथ की जाती है, तो इसका कोई नकारात्मक असर नहीं होता.

व्यक्तिगत अनुभव और समाजिक दृष्टिकोण
रामपुर के निवासी सुरेश वर्मा बताते हैं, “मैंने अपनी पत्नी के साथ बिना किसी दोष के कालसर्प पूजा करवायी. शुरुआत में चिंता थी, लेकिन पूजा के बाद मन में शांति और आत्मविश्वास बढ़ा.” ज्योतिषी भी यही सुझाव देते हैं कि पूजा को अनुष्ठान की तरह न देखें, बल्कि इसे आध्यात्मिक संतोष और सकारात्मकता का अनुभव मानें.

कालसर्प दोष न होने पर भी इस पूजा को करवाना हानिकारक नहीं है. यह केवल भगवान शिव और राहु-केतु की सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. व्यक्ति मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित महसूस करता है. पूजा का उद्देश्य केवल सकारात्मकता और मानसिक शांति है.

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