Skanda Sashti Vrat 2026: शुभ योग में आज स्कंद षष्ठी का व्रत, जानें महत्व, पूजा विधि और पूजन के लिए शुभ समय
Skanda Sashti Vrat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज स्कंद षष्ठी का व्रत किया जा रहा है, यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और षण्मुख के नाम से भी जाना जाता है. यह व्रत षष्ठी तिथि, विशेषकर शुक्ल पक्ष की षष्ठी को किया जाता है और इसका वर्णन स्कंद पुराण, कात्यायन स्मृति और कई दक्षिण भारतीय ग्रंथों में भी मिलता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर संतान सुख, साहस, विजय और रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. दक्षिण भारत में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां भगवान को मुरुगन के रूप में पूजा जाता है. आइए जानते हैं स्कंद षष्ठी का महत्व, पूजा विधि और पूजन मुहूर्त…
स्कंद षष्ठी का महत्व
स्कंद षष्ठी का व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, शत्रु नाश, बुद्धि और बल की प्राप्ति के लिए किया जाता है. मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर सच्चे मन से पूजा करता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय मिलती है. साथ ही भगवान सभी इच्छाओं को पूरा भी करते हैं. धर्म विशेषज्ञों के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति और संतान की उन्नति के लिए फलदायी माना जाता है. साथ ही, यह दिन आत्मबल, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का प्रतीक भी है. कई स्थानों पर छह दिनों तक चलने वाले उत्सव का समापन षष्ठी तिथि पर विशेष पूजा और आरती के साथ किया जाता है.
स्कंद षष्ठी पर शुभ योग
आज सभी कार्य सिद्ध करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग भी है, जो सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शाम 5 बजकर 54 मिनट तक और रवि योग शाम 5 बजकर 54 मिनट से 23 फरवरी की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. ये शुभ योग पूजा, व्रत और मंत्र जाप के साथ ही नए कार्य के लिए भी उत्तम माने जाते हैं.
स्कंद षष्ठी पर पूजन मुहूर्त
शुभ मुहूर्त और योग की बात करें तो आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 3 मिनट तक. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक. विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक है. वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 39 मिनट तक और अमृत काल सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है.
स्कंद षष्ठी की पूजा विधि
स्कंद षष्ठी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर में भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें. इसके बाद पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप-दीप अर्पित करें. भगवान को लाल या पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान स्कन्द को पीला फूल, धूप, दीप, नैवेद्य खासकर कंदमूल जैसे आलू, शकरकंद और फल चढ़ाना फलदायी होता है. व्रत में फलाहार या एक समय भोजन करें. पूजा के दौरान ‘ॐ सरवनभवाय नमः’ मंत्र का जाप करें. श्रद्धालु स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ भी करते हैं. दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखा जाता है और शाम को आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है.


