Phalguna Amavasya 2026: परिघ योग में फाल्गुन अमावस्या आज, स्नान बाद करें पितरों की पूजा, तर्पण, जानें विधि, मुहूर्त और महत्व
फाल्गुन अमावस्या मुहूर्त
फाल्गुन अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 16 फरवरी, सोमवार, 5:34 पीएम से
फाल्गुन अमावस्या तिथि का समापन: 17 फरवरी, मंगलवार, 5:30 पीएम पर
फाल्गुन अमावस्या स्नान का समय: ब्रह्म मुहूर्त 05:16 ए एम से 06:07 ए एम तक, सूर्योदय बाद भी कर सकते हैं.
पितरों के श्राद्ध का समय: दिन में 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक
फाल्गुन अमावस्या का शुभ समय: अभिजित मुहूर्त 12:13 पी एम से 12:58 पी एम तक
फाल्गुन अमावस्या पर तर्पण और पितृ पूजा
फाल्गुन अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें. उसके बाद अपने पितरों को याद करके काले तिल, फूल और जल से तर्पण दें. उसके बाद पितरों के देवता अर्यमा की पूजा करें. पितृ सूक्त का पाठ करें.
इसके बाद पितरों के लिए वस्त्र, अन्न, फल, गरम कपड़े, कंबल आदि का दान करें. पितरों को खुश करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध आदि कराएं. सूर्यास्त के बाद घर के बाहर दक्षिण दिशा में तेल का एक दीपक जलाएं. पीपल के पेड़ के नीचे भी यह दीपक जला सकते हैं. इससे पितृ लोक लौट रहे पितरों का मार्ग प्रकाशित रहता है और वे प्रसन्न होते हैं.
फाल्गुन अमावस्या का दान
पितरों के लिए दान देने के अलावा आप अपने लिए भी दान कर सकते हैं. फाल्गुन अमावस्या के स्नान के बाद आप अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. आप चाहें तो अन्न, वस्त्र, फल, धन आदि दान कर सकते हैं. मंगल दोष को दूर करने के लिए लाल मसूर, लाल रंग के वस्त्र, लाल फल, लाल चंदन आदि का दान कर सकते हैं. सूर्य दोष को दूर करने के लिए गेहूं, केसर, लाल वस्त्र, तांबा, लाल फल आदि दान कर सकते हैं.
भौमवती अमावस्या पूजा विधि
भौमवती अमावस्या के दिन आपको पवनपुत्र हनुमान जी और मंगल देव की पूजा करनी चाहिए. हनुमान जी को लाल फूल, माला, चंदन, धूप, दीप, लाल सिंदूर, फल, मिठाई आदि चढ़ाएं. हनुमान चालीसा का पाठ करें. हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें. बजरंगबली की कृपा से आपके संकट दूर होंगे और कष्टों से मुक्ति मिलेगी.


