Mahashivratri Special: महादेव की चमत्कारी दुनिया, दिन दो बार हो जाता है गायब, 200 साल पहले हुई थी खोज
महादेव की चमत्कारी दुनिया, दिन दो बार हो जाता है गायब, 200 साल पहले हुई थी खोज
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Mahashivratri Special 2026: भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाला यह पर्व आध्यात्मिक जागरण, तप और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर हम आपको महादेव के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जिसकी खोज 200 साल पहले की गई थी और समुद्र की लहरों से शिवलिंग का जलाभिषेक होता है.
Mahashivratri Special 2026: महाशिवरात्रि के मौके पर हम आपको देवों के देव महादेव के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी खोज 200 साल पहले की गई थी और समुद्र की लहरों से शिवलिंग का जलाभिषेक होता है. भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है, लेकिन गुजरात के वडोदरा में स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में अनोखा और चमत्कारी है. इसे महादेव के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मंदिर दिन में दो बार गायब हो जाता है. इतना ही नहीं, इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक समुद्र की लहरें स्वयं करती हैं.
200 साल पहले हुई थी खोज
कहा जाता है कि स्तंभेश्वर महादेव मंदिर की खोज लगभग 200 साल पहले हुई थी. इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं, क्योंकि यहां जो प्राकृतिक और धार्मिक चमत्कार देखने को मिलता है, वह कहीं और मुश्किल से मिलेगा. दरअसल, यह मंदिर समुद्र के किनारे बसा हुआ है. जब समुद्र में ऊंची और तेज लहरें उठती हैं, तो मंदिर पूरी तरह लहरों में डूब जाता है. यही लहरें शिवलिंग का जलाभिषेक भी करती हैं. यह घटना दिन में दो बार, सुबह और शाम, देखने को मिलती है. भक्तों के लिए यह अनुभव न केवल आध्यात्मिक है बल्कि आंखों के लिए भी अद्भुत दृश्य पेश करता है.
भोलेनाथ ने दिया ताड़कासुर का वर
मंदिर से जुड़ी कहानी भी बेहद रोचक है. मान्यता है कि ताड़कासुर नाम का असुर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या कर रहा था. उसने वरदान में मांग की कि केवल महादेव का छह महीने का पुत्र ही उसे मार पाए. भोलेनाथ ने उसे वरदान दे दिया. इसके बाद ताड़कासुर अपने आतंक से पूरी सृष्टि में हाहाकार मचा देता है.
ताड़कासुर शिव का भक्त
देवताओं और ऋषि-मुनियों की पुकार सुनकर भगवान शिव ने अपने पुत्र कार्तिकेय को ताड़कासुर का वध करने भेजा. जब कार्तिकेय को पता चला कि ताड़कासुर शिव का भक्त था, तो वे दुखी हुए, तब भगवान विष्णु ने उन्हें उस स्थान पर महादेव का मंदिर बनाने की सलाह दी. इसी तरह स्तंभेश्वर महादेव का निर्माण हुआ.
प्रकृति और इतिहास का अद्भुत संगम
यह मंदिर गांधीनगर से लगभग 175 किलोमीटर दूर जंबूसर के कंबोई गांव में स्थित है और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर है. स्तंभेश्वर महादेव मंदिर ना केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि प्रकृति और इतिहास का अद्भुत संगम भी है. जहां समुद्र की लहरें शिवलिंग को आशीर्वाद स्वरूप स्नान कराती हैं, वहां हर भक्त की आस्था और विश्वास और भी प्रगाढ़ हो जाता है. महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसर पर इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें


