Mahashivratri Special: शिव के पंचभूत स्थल के बारे में जानते हैं आप? पंच तत्व से जुड़े इन मंदिरों से चलती है पूरी सृष्टि, जानिए इनकी खासियत

Mahashivratri Special: शिव के पंचभूत स्थल के बारे में जानते हैं आप? पंच तत्व से जुड़े इन मंदिरों से चलती है पूरी सृष्टि, जानिए इनकी खासियत

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महाशिवारात्रि: शिव के पंचभूत स्थल के बारे में जानें? पंच तत्व के पंच शिव मंदिर

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Mahashivratri Special 2026: आज धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ और व्रत करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर आज हम आपको बताते हैं कि पंच तत्व को समर्पित भगवान शिव के पांच मंदिरों के बारे में…

Mahashivratri Special: आज देशभर में धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने इस रात्रि को पहली बार निराकार स्वरूप से साकार स्वरूप में प्रकट हुए थे. भगवान शिव से ही हर चीज की शुरुआत होती है और हर चीज का अंत भी. सभी तत्व, सभी ज्ञान और जो कुछ भी सृष्टि में मौजूद है, वह सब शिव से है. तारों से लेकर पत्थरों तक, जंगलों से लेकर इंसान तक, इस पूरी सृष्टि की रचना पांच मूल तत्वों से हुई है, जिन्हें हम पंचभूत कहते हैं. ये पंचतत्व हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश. भारतीय दर्शन में माना जाता है कि हमारा तन और मन भी इन्हीं तत्वों से बने हैं. जब इनमें संतुलन रहता है तो जीवन सहज चलता है और जब गड़बड़ होती है तो परेशानी शुरू हो जाती है. महाशिवरात्रि के मौके पर आइए जानते हैं भगवान शिव के पंच तत्व से जुड़े इन मंदिरों के बारे में..

शिव को शाश्वत योगी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे इन पंचतत्वों पर पूर्ण नियंत्रण और संतुलन का प्रतीक हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शिव ने दक्षिण भारत के पांच विशेष स्थानों पर इन्हीं पांच तत्वों के रूप में स्वयं को प्रकट किया. ये स्थान पंच भूत स्थल कहलाते हैं.

सबसे पहले बात करते हैं पृथ्वी तत्व की, जिसका प्रतिनिधित्व करता है कांचीपुरम का एकांबरेश्वर मंदिर. पृथ्वी तत्व स्थिरता, धैर्य और मजबूती का प्रतीक है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर भीतर से अस्थिर महसूस करते हैं. माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मन को ठहराव मिलता है और शरीर में स्थायित्व की भावना आती है.

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दूसरा है वायु तत्व, जो जीवन की सांस है. आंध्र प्रदेश का श्रीकालहस्ती मंदिर इसी तत्व से जुड़ा है. कहते हैं कि यहां शिव की पूजा वायु रूप में होती है. अगर आपने कभी इस मंदिर के गर्भगृह में दीपक को बिना हवा के हिलते देखा है, तो आप उस रहस्य को महसूस कर सकते हैं. वायु तत्व हमारे शरीर में श्वास, प्राण और विचारों से जुड़ा है. यहां दर्शन करने से मन का बोझ हल्का महसूस होता है. जो लोग तनाव, घबराहट या बेचैनी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह स्थान खास माना जाता है.

Arulmigu Arunachaleswarar Temple

अब आते हैं अग्नि तत्व पर, जो ऊर्जा, आत्मबल और परिवर्तन का प्रतीक है. तमिलनाडु के अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलई में शिव को अग्नि स्तंभ के रूप में पूजा जाता है. अग्नि तत्व हमें आलस्य से बाहर निकालता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. माना जाता है कि यहां दर्शन करने से भीतर की नकारात्मकता जलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है.

इसके बाद आता है जल तत्व, जो भावनाओं और जीवन प्रवाह से जुड़ा है. तिरुचिरापल्ली के पास स्थित जंबुकेश्वर मंदिर में शिव निरंतर जल से अभिषिक्त रहते हैं. जल तत्व हमें सिखाता है कि जीवन में बहाव जरूरी है. जो लोग भावनात्मक रूप से भारीपन, दुख या उलझन महसूस करते हैं, उन्हें यहां आकर शांति मिलती है. यह स्थल हमें बताता है कि जैसे पानी रास्ता बना ही लेता है, वैसे ही जीवन में भी हर समस्या का समाधान संभव है.

अंत में है आकाश तत्व. चिदंबरम का नटराज मंदिर आकाश तत्व का प्रतीक है. यहां कोई ठोस लिंग नहीं, बल्कि खाली स्थान की पूजा होती है. आकाश तत्व चेतना और विस्तार से जुड़ा है. यहां दर्शन करने से मन शांत होता है और व्यक्ति खुद से गहराई से जुड़ता है. नटराज का नृत्य जीवन के सृजन और विनाश दोनों का संतुलन दिखाता है.

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