Shani Pradosh Vrat Katha : शनि प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ने व सुनने मात्र से हर परेशानि से मिलेगी मुक्ति

Shani Pradosh Vrat Katha : शनि प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ने व सुनने मात्र से हर परेशानि से मिलेगी मुक्ति

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शनि प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ने व सुनने मात्र से हर परेशानि से मिलेगी मुक्ति

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Shani Pradosh Vrat Katha : शनि प्रदोष व्रत की कथा आस्था, धैर्य और विश्वास का प्रतीक है. यह भक्तों को सिखाती है कि जीवन में आने वाले कष्ट कर्मों का फल होते हैं, लेकिन भगवान शिव की भक्ति और सत्कर्मों से हर संकट को टाला जा सकता है. श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं कथा श्रवण करने से सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. यहां पढ़ें संपूर्ण शनि प्रदोष व्रत कथा…

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Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi : आज शनि प्रदोष तिथि का व्रत किया जाएगा, हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. जब यह तिथि शनिवार के दिन पड़ता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और शनिदेव से जुड़े कष्टों में राहत मिलती है. शनि प्रदोष व्रत में केवल उपवास ही नहीं, बल्कि कथा सुनना या पढ़ना भी अनिवार्य माना गया है. शनि प्रदोष व्रत कथा श्रवण से मन में सकारात्मकता आती है और श्रद्धा दृढ़ होती है. यहां पढ़ें संपूर्ण शनि प्रदोष व्रत की कथा…

शनि प्रदोष व्रत कथा (Shani Pradosh Vrat Katha)

शनि प्रदोष व्रत कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर सेठजी रहते थे. सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान ना होने वजह से सेठ और सेठानी हमेशा दुखी रहते थे. काफी सोच-विचार करके सेठजी ने अपना काम नौकरों को सौंप दिया और खुद सेठानी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े.

अपने नगर से बाहर निकलने पर सेठजी को एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे थे. सेठजी ने सोचा, क्यों ना साधु से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा की जाए. सेठ और सेठानी साधु के निकट बैठ गए. साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि सेठ और सेठानी काफी समय से आशीर्वाद की प्रतीक्षा में बैठे हैं. साधु ने सेठ और सेठानी से कहा कि मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं. तुम शनि प्रदोष व्रत करो, इससे तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा. साधु ने सेठ-सेठानी प्रदोष व्रत की विधि भी बताई और शंकर भगवान की निम्न वंदना बताई.

हे रुद्रदेव शिव नमस्कार .
शिवशंकर जगगुरु नमस्कार ॥
हे नीलकंठ सुर नमस्कार .
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार ॥
हे उमाकांत सुधि नमस्कार .
उग्रत्व रूप मन नमस्कार ॥
ईशान ईश प्रभु नमस्कार .
विश्‍वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार ॥
दोनों साधु से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा के लिए आगे चल पड़े. तीर्थयात्रा से लौटने के बाद सेठ और सेठानी ने मिलकर शनि प्रदोष व्रत किया जिसके प्रभाव से उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ और खुशियों से उनका जीवन भर गया.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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