PM Modi 13 फरवरी को ही क्यों हुए नए ऑफिस में शिफ्ट, गुजराती पंचांग से क्या है कनेक्शन?
PM Modi ने 13 फरवरी को ही बदला PMO, गुजराती पंचांग से क्या है संबंध?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी 13 फरवरी को सेवा तीर्थ का उद्धाटन किया है. विजया एकादशी के मौके पर सेवा तीर्थ का उद्धाटन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन से शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य हमेशा शुभ फलदायी होता है और हर कार्य में विजय भी मिलती है. आइए जानते हैं आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ के उद्धाटन के लिए 13 फरवरी का दिन क्यों चुना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ का उद्धाटन किया है, यानी आज से पीएम मोदी का ऑफिस बदल गया है और यह ऑफिस अब सेवा तीर्थ में शिफ्ट हो गया है. प्रधानमंत्री ने दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर सेवा तीर्थ बिल्डिग कॉम्पलेक्स के नाम का अनावरण किया था. सेवा तीर्थ बिल्डिग के साथ ही प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन – 1 और कर्तव्य भवन – 2 का भी उद्धाटन किया था, जहां कई प्रमुख मंत्रालय को शिफ्ट किया जाएगा और अब से वहीं कार्य किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने आज सेवा तीर्थ का उद्घाटन और नए कार्यालय में काम की शुरुआत धार्मिक व प्रतीकात्मक महत्व को ध्यान में रखते हुए की है. दरअसल आज का दिन गुजराती पंचांग में विशेष महत्व रखता है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने आज का दिन चुना. आइए जानते हैं प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ के उद्धाटन के लिए 13 फरवरी का दिन क्यों चुना?

गुजाराती पंचांग के हिसाब से आज माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी है, जिसे हिंदू परंपरा में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत करके विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने पर श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य दीर्घकाल तक सफल और स्थिर रहता है. सरकार नए प्रशासनिक ढांचे को सेवा और जनकल्याण से जोड़कर पेश करना चाहती है. शुभ धार्मिक तिथि पर शुरुआत करना इस संदेश को मजबूत करता है.

पुराने औपनिवेशिक प्रतीकों से हटकर नए भारत की प्रशासनिक सोच और कार्यशैली को दर्शाने के लिए भी इस दिन को चुना गया माना जा रहा है. षटतिला एकादशी जैसे शुभ दिन पर नए कार्यालय से काम शुरू करना सरकार की ओर से नए संकल्प और नए प्रशासनिक विजन का प्रतीकात्मक संकेत भी माना जा रहा है.
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13 फरवरी का दिन ऐतिहासिक महत्व भी है क्योंकि 13 फरवरी 1931 को ही नई दिल्ली को औपचारिक रूप से भारत की राजधानी के रूप में मान्यता मिली थी. यह ऐतिहासिक दिन नई दिल्ली के 95 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भी चुना गया है.

उत्तर भारत में आज विजया एकादशी तिथि का व्रत किया जा रहा है और दो दिन बाद महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. विजया एकादशी के दिन नए ऑफिस की शुरुआत ही बताता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य हमेशा विजय दिलाता है. भगवान राम ने भी इस तिथि का व्रत किया जाता है, तभी उनको समुद्र ने रास्ता दिया और लंका पर विजय प्राप्त की थी.

भारत में तिथियों, व्रत-त्योहारों और शुभ मुहूर्त की गणना के लिए पंचांग का विशेष महत्व है. हालांकि मूल आधार समान होने के बावजूद गुजराती पंचांग और उत्तर भारत के पंचांग में कुछ अहम अंतर देखने को मिलते हैं. यही वजह है कि कई बार एक ही पर्व की तिथि या नववर्ष की शुरुआत अलग-अलग समय पर दिखाई देती है.

सबसे बड़ा अंतर हिंदू नववर्ष की शुरुआत को लेकर है. गुजरात में नया वर्ष दीपावली के अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है. इसे बेस्टु वर्ष भी कहा जाता है. वहीं उत्तर भारत में नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानी जाती है, जो आमतौर पर मार्च-अप्रैल में पड़ती है. इस दिन से विक्रम संवत का नया वर्ष प्रारंभ होता है और कई राज्यों में इसे नवसंवत्सर के रूप में मनाया जाता है.

पंचांग गणना में दूसरा प्रमुख अंतर मास गणना पद्धति का है. गुजराती पंचांग मुख्यतः अमांत प्रणाली का अनुसरण करता है, जिसमें माह अमावस्या के अगले दिन से शुरू होकर अगली अमावस्या तक चलता है. वहीं उत्तर भारत के अधिकांश पंचांग पूर्णिमांत प्रणाली पर आधारित होते हैं, जिसमें माह पूर्णिमा के अगले दिन से प्रारंभ होकर अगली पूर्णिमा तक माना जाता है. इस कारण कई बार महीनों के नाम और तिथियों में अंतर दिखाई देता है.

दोनों पंचांगों में त्योहारों की मूल तिथि चंद्र गणना पर आधारित होती है, लेकिन अमांत और पूर्णिमांत प्रणाली के कारण पर्वों के महीने के नाम में बदलाव हो सकता है. उदाहरण के तौर पर, गुजरात में कार्तिक माह की गणना उत्तर भारत से अलग तरीके से होती है. हालांकि प्रमुख त्योहार जैसे होली, दिवाली, जन्माष्टमी आदि की तिथि सामान्यतः एक ही दिन पड़ती है, लेकिन स्थानीय पंचांग के अनुसार माह का उल्लेख अलग हो सकता है.


