East Facing House Vastu In Hindi: पूर्वमुखी घर क्यों माना जाता है सबसे शुभ? वास्तु के वो नियम जो 90% लोग नजरअंदाज कर देते हैं
East Facing House Vastu In Hindi: क्या आपका घर पूर्व दिशा की ओर खुलता है? अगर हां, तो इसे वास्तु के हिसाब से बहुत अच्छा माना जाता है. वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को सूरज की दिशा कहा गया है. सूरज सिर्फ रोशनी ही नहीं देता, बल्कि ऊर्जा, सेहत और पॉजिटिव माहौल का भी बड़ा जरिया माना जाता है. सुबह की पहली किरणें जब सीधे घर में आती हैं, तो पूरे वातावरण में ताजगी बनी रहती है और मन भी अच्छा महसूस करता है, लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर पूर्वमुखी घर अपने आप शुभ नहीं हो जाता. कई लोग सिर्फ दिशा देखकर घर बनवा लेते हैं, मगर अंदर की प्लानिंग पर ध्यान नहीं देते. इसी वजह से कई बार फायदे की जगह नुकसान झेलना पड़ता है. पूर्वमुखी घर से मान-सम्मान, तरक्की और अच्छी सेहत मिल सकती है, लेकिन तभी जब कमरे, दरवाजे, रसोई और टॉयलेट सही दिशा में हों. इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में जानेंगे कि पूर्वमुखी घर के फायदे क्या हैं, कौन-सी गलतियां नुकसान पहुंचा सकती हैं और सही वास्तु प्लानिंग कैसे की जाए, ताकि घर में सुख-शांति बनी रहे.
पूर्व दिशा क्यों मानी जाती है खास?
पूर्व दिशा उगते सूरज की दिशा है. यही वजह है कि इसे नई शुरुआत और पॉजिटिव एनर्जी से जोड़ा जाता है.
-स्वामी ग्रह: सूर्य
-देवता: इंद्र देव
-तत्व: वायु
-असर: नाम-यश, आत्मविश्वास, करियर में आगे बढ़ने की ताकत
पूर्वमुखी घर में सुबह की धूप सीधे आती है, जिससे घर का माहौल साफ रहता है और शरीर को प्राकृतिक एनर्जी मिलती है.
पूर्वमुखी घर के शुभ परिणाम
अगर वास्तु के नियम सही तरीके से अपनाए जाएं, तो पूर्वमुखी घर कई अच्छे फल देता है.
-धन और परिवार की बढ़ोतरी: घर के पूर्व हिस्से में खाली जगह, गार्डन या पार्किंग हो तो आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
-मान-सम्मान में इजाफा: जब पूर्व दिशा थोड़ी नीची और दक्षिण दिशा ऊंची हो, तो समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है.
-अच्छी सेहत: पूर्व दिशा में खुलापन और हल्कापन होने से घर में रहने वाले लोग ज्यादा एक्टिव और स्वस्थ रहते हैं.
-पॉजिटिव माहौल: मुख्य दरवाजा पूर्व की ओर हो तो घर में शांति और संतुलन बना रहता है.
पूर्वमुखी घर के अशुभ परिणाम और वास्तु दोष
गलत प्लानिंग की वजह से यही घर परेशानी का कारण भी बन सकता है.
आम वास्तु दोष
-पूर्व दिशा का ज्यादा ऊंचा होना
-उत्तर-पूर्व में टॉयलेट
-दक्षिण-पूर्व में मुख्य दरवाजा
-पूर्व में कूड़ा, भारी पत्थर या ऊंची दीवार
-पूर्व दिशा में सेप्टिक टैंक
संभावित नुकसान
-आर्थिक तंगी
-संतान से जुड़ी परेशानी
-मानसिक तनाव
-कोर्ट-कचहरी या कर्ज की स्थिति
इसलिए पूर्व दिशा को हमेशा साफ, हल्का और खुला रखना बेहद जरूरी है.
पूर्वमुखी घर की सही वास्तु प्लानिंग गाइड
1. मुख्य प्रवेश द्वार
-सबसे अच्छा स्थान: पूर्व दिशा का बीच का हिस्सा या उत्तर-पूर्व
-9 पादों में तीसरा, चौथा या पांचवां पाद शुभ माना जाता है
-दक्षिण-पूर्व में दरवाजा बनाने से बचें
-दरवाजा मजबूत, साफ और बाकी दरवाजों से बड़ा रखें
2. रसोई घर
-सही दिशा: दक्षिण-पूर्व
-खाना बनाते समय चेहरा पूर्व की ओर हो
-उत्तर-पूर्व में रसोई न बनाएं, इससे घर में असंतुलन आता है

3. मास्टर बेडरूम
-सबसे अच्छी दिशा: दक्षिण-पश्चिम
-पूर्व दिशा में मास्टर बेडरूम बनाने से बचना चाहिए
-बेड इस तरह रखें कि सोते समय सिर दक्षिण या पश्चिम की ओर हो
4. पूजा कक्ष
-सबसे सही जगह: उत्तर-पूर्व
-विकल्प के रूप में पूर्व दिशा भी ठीक है
-पूजा करते समय मुंह पूर्व या उत्तर की ओर रखें

5. टॉयलेट और सेप्टिक टैंक
-सही दिशा: उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम
-पूर्व और उत्तर-पूर्व में टॉयलेट बनाना भारी नुकसान दे सकता है
6. बच्चों का स्टडी रूम
-सही दिशा: पूर्व या उत्तर-पूर्व
-पढ़ाई करते समय बच्चों का मुंह पूर्व की ओर हो
-इससे एकाग्रता और याददाश्त बेहतर होती है
पूर्व दिशा के लिए खास वास्तु टिप्स
-पूर्व और उत्तर दिशा में ज्यादा खुली जगह रखें
-भूमिगत पानी की टंकी पूर्व दिशा में शुभ मानी जाती है
-पूर्व और उत्तर की दीवारें दक्षिण और पश्चिम से नीची रखें
-पूर्व दीवार पर उगते सूरज की तस्वीर लगाएं
-पूर्व दिशा में हरा-भरा पौधा रखें
पूर्वमुखी घर सही वास्तु के साथ बनाया जाए, तो यह जीवन में तरक्की, सेहत और सुख-शांति लाता है. गलत प्लानिंग इसे परेशानी का कारण बना सकती है. इसलिए दिशा के साथ-साथ अंदरूनी लेआउट पर पूरा ध्यान देना जरूरी है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


