Mauni Amavasya 2026: बेहद शुभ योग में आज मौनी अमावस्या, जानें स्नान-दान का मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Mauni Amavasya 2026: बेहद शुभ योग में आज मौनी अमावस्या, जानें स्नान-दान का मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Mauni Amavasya 2026 Today: आज मौनी अमावस्या का पावन पर्व बेहद शुभ योग में मनाया जा रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन मौन, स्नान, दान और तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. विशेष योगों के कारण आज किया गया स्नान-दान और पूजा कई गुना फलदायी मानी जा रही है. साथ ही आज जो व्यक्ति मौन रहता है, उसको वाक् सिद्धि प्राप्त होती है. साथ ही मौनी अमावस्या पितरों को तृप्त करने का सर्वोत्तम दिन माना जाता है. इस दिन किया गया तर्पण सात पीढ़ियों तक शांति और आशीर्वाद देता है और पितृ दोष, पारिवारिक बाधाएं और आर्थिक रुकावटें कम होती हैं. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर बन रहे शुभ योग, स्नान-दान मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में…

मौनी अमावस्या पर शुभ योग

आज मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ हर्षण योग बन रहा है. साथ ही आज चंद्रमा मकर राशि में जाएंगे, जिससे पंचग्रही योग का निर्माण होगा. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मकर राशि में इस समय सूर्य, बुध, शुक्र, चंद्र और मंगल ग्रही की युति बन रही है, जिससे पंचग्रही योग, बुधादित्य योग, आदित्य मंगल योग, लक्ष्मी नारायण योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.

मौनी अमावस्या 2026 आज

अमावस्या तिथि का प्रारंभ – 18 जनवरी, मध्य रात्रि 12 बजकर 3 मिनट से
अमावस्या तिथि का समापन – 19 जनवरी, मध्य रात्रि 1 बजकर 21 मिनट तक
उदिया तिथि के आधार पर मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी दिन रविवार को मनाया जा रहा है.

मौनी अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 12:10 पी एम से 12:53 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 05:46 पी एम से 06:13 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग: 10:14 ए एम से 07:14 ए एम, 19 जनवरी

मौनी अमावस्या का महत्व

मौनी अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है. मौनी शब्द की उत्पत्ति मौन शब्द से हुई है और इसका अर्थ है मौन यानी चुप रहना. बताया जाता है यह दिन ईश्वर के साथ-साथ पूर्वजों की आराधना के लिए भी बेहद खास माना जाता है. मौन रहना सबसे बड़ा तप माना जाता है, क्योंकि इससे मन शांत होता है, विचार संयमित रहते हैं और आत्म-चिंतन बढ़ता है. मान्यता है कि मौन से वाणी की शुद्धि होती है, पापों का नाश होता है तथा आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है. यह व्रत पूर्वजों की कृपा और पितृदोष निवारण के लिए भी विशेष फलदायी है.

मौनी अमावस्या पूजा विधि

  • आज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्मों को करने के बाद गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें. अगर आप किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं नहाने के पानी में गंगाजल मिलकर स्नान कर सकते हैं. इसके बाद से ही मौन व्रत शुरू कर दें.
  • स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और हाथ में अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें.
  • इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करें. श्रीहरि को तुलसी, फूल, फल, चंदन, अक्षत आदि पूजा से संबंधित चीजें अर्पित करें और घी से आरती करें. इसके बाद विष्णु चालीसा का पाठ करें.
  • विष्णुजी की पूजा के बाद तुलसी माता की पूजा करें और मैया की 108 बार परिक्रमा करें.
  • पूजा-पाठ करने के बाद पितरों के नाम का दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके तर्पण अवश्य करें.
  • इसके बाद पितरों के नाम का दान गरीब व जरूरतमंद लोगों को भोजन, धन अथवा वस्त्र आदि दान करें.

Source link

Previous post

Mauni Amavasya 2026 Upay: मौनी अमावस्या पर पाप मुक्ति के लिए करें भगवान विष्णु के 1000 नामों का जाप, यहां पढ़ें विष्णु सहस्रनाम संपूर्ण पाठ

Next post

Premanand Ji Maharaj : प्यार में दिल टूटा है? रुकिए! प्रेमानंद जी महाराज की यह बात सुन ली तो दर्द ताकत बन जाएगा

You May Have Missed