Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर टूट जाए मौन व्रत, तो क्या करें? ज्योतिषाचार्य से जानें दोष मुक्ति का उपाय

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर टूट जाए मौन व्रत, तो क्या करें? ज्योतिषाचार्य से जानें दोष मुक्ति का उपाय

Mauni Amavasya 2026 Maun Vrat Tut Jaye To Kya Kare: मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को है. इस दिन लोग स्नान और दान के साथ ही मौन व्रत रखते हैं. मौन व्रत काफी कठिन माना जाता है क्योंकि आप पूरे दिन न बोलने का संकल्प लेते हैं. यदि गलती से भी एक शब्द आपके मुख से निकलता है तो आपका मौन व्रत टूट जाता है. इससे दोष लगता है. एक मौन व्रत स्नान करने तक का होता है, जब आप उठते हैं और जब तक स्नान नहीं कर लेते तब तक कुछ नहीं बोलते हैं, मौन धारण करके रखते हैं. इसमें भी भूलवश व्यक्ति स्नान से पहले ही बोले देता है और उसका व्रत टूट जाता है. मौनी अमावस्या पर मौन व्रत टूट जाए तो क्या करें? दोष से मुक्ति का उपाय क्या है?

मौन व्रत टूट जाए तो क्या करें?

काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट का कहना है कि मौनी अमावस्या पर मौन व्रत के नियम हैं, जिसका पालन करना चाहिए. यदि आपको मौन व्रत रखना ही है तो एक दिन पहले तय कर लें. उसके अनुसार मौनी अमावस्या की सुबह उठकर दैनिक क्रिया से निवृत हो जाएं और स्नान कर लें. स्नान करने तक कुछ भी न बोलें. जो संकल्प लेकर पूरे दिन का मौन व्रत रखते हैं, वे प्रण कर लें कि वे नहीं बोलेंगे. फिर भी किसी कारण से उनका मौन व्रत टूट जाता है तो परेशान न हों.

मौन व्रत का उद्देश्य आत्म चिंतन, ईश्वर से आत्मा के जुड़ाव, अंतर्मन की यात्रा, आध्यात्मिक उन्नति का है. इस वजह से लोग मौन होकर एक दिन स्वयं को तलाशते हैं. वे कौन हैं, उनके जन्म का उद्देश्य क्या है, यह मानव जीवन क्यों मिला है? मौन व्रत के माध्यम से आप अपने करियर, आध्यात्म आ​दि का विश्लेषण कर सकते हैं. इस दौरान मानसिक मंत्र जाप, अपने इष्ट के नाम का जाप कर सकते हैं.

दोष निवारण उपाय

जिन लोगों का मौन व्रत टूटता है, तो उनको दोष लगता है. वे लोग मौन व्रत टूटने के बाद विशेषकर काले तिल का दान करें. तिल के अलावा आप सप्तधान्य या अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान करें. व्रत टूट गया है तो मन में कष्ट या ग्लानि हो सकती है, इसका भी निवारण जरूरी है.

इस कष्ट से मुक्ति का सबसे आसान उपाय है कि आप अपने मुख से भजन-कीर्तन करें. किसी गुरु से दीक्षा ली है तो उनसे प्राप्त गुरु मंत्र का जाप करें. आपके जो भी इष्ट देव हैं, उनके नाम का जाप कर सकते हैं. या फिर जो मंत्र आपको अच्छा लगता है, जिसके जाप से आपको मानसिक शांति मिलती है, उस मंत्र का जाप कर सकते हैं.

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