Bhogi 2026 Date: कब है भोगी मंटालु? जानें महत्व, रीति-रिवाज और पोंगल से एक दिन पहले क्यों मनाया जाता है यह पर्व
Bhogi 2026 Date: भोगी पंडिगई दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है. साथ ही यह पर्व चार दिवसीय पोंगल उत्सव की शुरुआत का प्रतीक भी है. इस पर्व का दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है. भोग केवल एक त्योहार नहीं है बल्कि यह नवीनीकरण, सकारात्मकता और समृद्ध फसल के मौसम की तैयारी का प्रतीक है. आइए जानते हैं भोगी का पर्व कब मनाया जाएगा और इस पर्व का क्या है महत्व…
भोगी 2026: तारीख और समय
भोगी पंडिगई: 13 जनवरी 2026 दिन मंगलवार
भोगी संक्रांति मुहूर्त: 14 जनवरी, 2026 को दोपहर 3:13 बजे
मकर संक्रांति: गुरुवार, 15 जनवरी, 2026
भोगी मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है और इसके बाद कनुमा पंडुगा/मट्टू पोंगल और मुक्कनुमा/कानुम पोंगल मनाए जाते हैं, जिससे चार दिवसीय फसल उत्सव पूरा होता है. पुराणों में इंद्र को वर्षा और अन्न का अधिपति कहा गया है. भोगी के दिन इंद्र देव की उपासना कर अच्छी वर्षा, समृद्ध फसल और ग्राम-जीवन की उन्नति की कामना की जाती है.
भोगी पर्व सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश से ठीक पहले आता है. यह काल तमस से सत्त्व की ओर बढ़ने का सूचक है. यह पर्व पुराने कर्मों के बोझ को छोड़कर नए शुभ कर्म चक्र की शुरुआत का संकेत देता है.
पोंगल से भोगी का संबंध
पोंगल चार दिवसीय पर्व है और भोगी उसका पहला दिन होता है.
भोगी पोंगल – त्याग और शुद्धिकरण
सूर्य पोंगल – सूर्य देव की उपासना
मट्टू पोंगल – पशुधन (गाय-बैल) का सम्मान
कानुम पोंगल – सामाजिक मेल-मिलाप
भोगी पंडिगई का महत्व
भोगी मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है और यह मुख्यतः इंद्र देव को समर्पित पर्व माना जाता है. भोगी शब्द का अर्थ है, भोगों का त्याग. इस दिन पुराने, अनुपयोगी और नकारात्मक वस्तुओं को अग्नि में समर्पित किया जाता है, जिसे भोगी मंटलु कहते हैं. यह अग्नि अज्ञान, आलस्य, रोग और दरिद्रता के त्याग का प्रतीक मानी जाती है. यह परंपरा इस विश्वास को दर्शाती है कि एक नई शुरुआत आने वाले वर्ष में विकास, खुशहाली और समृद्धि का रास्ता खोलती है. भोगी पोंगल उत्सवों की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है. इस तरह घरों की पूरी तरह साफ-सफाई की जाती है, रंग-बिरंगे कोलम से सजाया जाता है और आने वाले भव्य फसल उत्सवों के लिए तैयार किया जाता है.

क्या है भोगी मंटालु?
भोगी की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है भोगी मंटालु, जिसमें पुराने लकड़ी के सामान और फेंके गए वस्तुओं से एक अलाव जलाया जाता है. यह क्रिया नकारात्मकता को जलाकर भौतिक और आध्यात्मिक रूप से बदलाव को अपनाने का प्रतीक है. परिवार इस अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, जो नवीनीकरण और सकारात्मक बदलाव के लिए सामूहिक तैयारियों को दर्शाता है.


